इमरान हाशमी की हालिया फिल्म शंघाई में एक तरफ तो इमरान के नए लुक की चर्चा है तो दूसरी ओर अभय देओल के लाजवाब अभिनय दर्शकों की खूब तालियां बटोर रहा है पढि़ए तान्या चौहान की रिपोर्ट..

Shanghai Movieइस शुक्रवार को रिलीज हुई फिल्म शंघाई में इमरान हाशमी अपनी सीरियल किसर वाली भूमिका से अलग हटकर दिखाई दे रहे हैं। शंघाई में इमरान का लुक उनकी अन्य फिल्मों से काफी अलग है। वजन बढ़ा हुआ, पान गुटखे से सने पीले दांत, सांवला रंग और आंखों के नीचे गहरे काले गढ्ढे। अपनी रोमांटिक इमेज से अलग हटकर, इमरान ने इस फिल्म में एक ऐसा ठेठ किरदार निभाया है जिसे देखकर उनकी किसी दूसरी फिल्म यहां तक कि मर्डर की याद भी शायद नहीं आएगी। फिल्म में जोगी का किरदार, विडियो शूटिंग का काम करता है जो आगे चलकर फिल्म की अहम कड़ी बनकर सामने आता है। तीस साल से ऊपर का जोगी परमार दिखने के लिए इमरान ने करीब 10 किलो वजन बढ़ाया ताकि उनके गाल जरा भरे हुए और तोंद थोड़ी बाहर निकली हुई दिखे।
प्रकाश झा की फिल्म ‘राजनीति’ के बाद अब दिबाकर बनर्जी ने शंघाइ में राजनीति का नया रूप पेश किया है। अपनी फिल्म को हिट कराने के लिए जो कहानी दिबाकर बनर्जी ने चुनी है वो न केवल सुलझी हुई है बल्कि दर्शकों को बेहद सहज लग रही होगी। ‘शंघाई’ कहानी है भारत नगर को एक इंटरनेशनल बिजनेस पार्क (आईबीपी) में तब्दील करने की, जिसके विरोध में आवाज बुलंद की है डॉ. अहमदी (प्रसोनजीत चटर्जी) ने। उनके आने से शहर में तनाव है और भाषण पर पाबंदी भी। ऐसे में उनके कुछ साथी और शालिनी (कल्कि) उनका भाषण मैनेज करवा देते हैं, पर उसी रात उन पर जानलेवा हमला हो जाता है।
इस हमले के बाद कहानी एक नया मोड़ लेती है। मामले की जांच के लिए एक कमीशन गठित होता है, जिसकी अगुवाई करता है आईएएस कृष्णन (अभय देओल)। कृष्णन, सीएम (सुप्रिया पाठक) का खास है और उनके सचिव कौल (फारुख शेख) का एक मोहरा भी। इस जांच में जोगी (इमरान हाशमी) एक अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि हादसे वाले दिन की वीडियो फुटेज उसके पास है। जोगी ही शालिनी की मदद से हमले के दोषी को पकड़ नेता है, लेकिन ये जांच इतनी आसान नहीं होती। कृष्णन को हर दूसरे कदम पर नौकरशाही के अड़ंगेबाजी का सामना करना पड़ता है।
इमरान हाशमी, अभय देओल और कल्कि जैसे सितारों के साथ ‘शंघाई’ दर्शकों को पसंद आ सकती है। उन्होंने एक जटिल विषय को इस तरह निखार दिया है कि फिल्म में रोचकता सीन दर सीन बढ़ती जाती है। खासतौर से इंटरवल के बाद, जब अभय देओल का रोल अपने फुल कलर में आता है। उन्होंने एक आईएएस अफसर को बॉलीवुड के उस मसाला हीरो की तरह पेश कर डाला है, जो एक गोली के दो टुकड़े कर दो तरफा निशाना लगा सकता है, लेकिन ये सब उन्होंने काफी कूल अंदाज में दिखाया है। वास्तविकता के करीब रह कर रीयल लाइफ को कैमरे में कैद करने की कला ही इस फिल्म की जान है। इमरान हाशमी को नए जुक में देखना हो तो जरूर जाएं शंघाई देख सकते हैं।

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