2014_6image_11_01_000900000adwani-llभाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवानी संसद भवन में शायद अपना वह कमरा गंवा बैठे हैं जो उनके पास बतौर एनडीए ् के कार्यकारी अध्यक्ष की हैसियत से पिछले दस साल से था। यही नहीं लोकसभा में भी सीटों का आबंटन नहीं होने के कारण उनके बैठने का कोई नियत स्थान नहीं था। पूर्व उप प्रधानमंत्री के कमरा संख्या 4 गंवाने का संकेत इस बात से मिला कि कमरे के बाहर उनके नाम की तख्ती नहीं थी जबकि एनडीए अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी की नेमप्लेट उसी कक्ष के बाहर लगी थी। वाजपेयी खराब स्वास्थ्य के कारण इस कक्ष में नहीं बैठते हैं और अडवानी ही यहां बैठा करते थे।अडवानी की नेमप्लेट और एनण्डीण्एण् के कार्यकारी अध्यक्ष के पद की तख्ती का नहीं होना साफ दिख रहा था क्योंकि ये घटनाक्रम उस समय हुआए जब नई लोकसभा के गठन के बाद कमरों का नए सिरे से आवंटन हो रहा था। 86 वर्षीय अडवानी ने भाजपा संसदीय दल के कार्यालय में आराम कियाए जहां आम तौर पर सामान्य पार्टी नेता बैठते हैं। अडवानी हालांकि भाजपा संसदीय दल के अध्यक्ष हैं लेकिन वह कमरे की मुख्य कुर्सी पर बैठने की बजाय सोफे पर बैठे। अडवानी के निकट सूत्रों ने इस मुद्दे को खास तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि कोई भ्रम नहीं है। साथ ही विश्वास जताया कि अडवानी को जल्द ही कमरा आवंटन हो जाएगा। लोकसभा सचिवालय ने कहा कि कमरों के आवंटन में उसकी कोई भूमिका नहीं है।

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