28 मई को शनि जंयति है। शनि देव को खुश कर इंसान हर संकट से बच सकता है। शनि जंयति पर पूजा करने का विशेष महत्व है। शनि जयंती पर पूजा अर्चना
शनि जयंती पर शनि भगवान की अनुकूलता पाने के लिए प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर अपनी दैनिक पूजा अर्चना-ईष्ट ध्यान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिये शनि स्तोत्र एवं कवच का पाठ करना saniचाहिये।
संध्या को पीपल के पेड के नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं। शनि से कृपा भाव की प्रार्थना करें। शिव मंदिर में रुद्राभिषेक, हनुमान चासीला व सुंदरकांड के पाठ उचित फल देते हैं। शनि प्रतिमा का सरसों तेल से अभिषेक करें। सरसों तेल, गुड से बने गुलगुले काले कुत्तों व चीलों को खिलाएं। काले उडद की खिचडी वितरित करें। शनि से संबंधित वस्तुओं का पात्र व गरीबों को दान करें।
दान की वस्तुएं
भक्त को अपनी श्रद्घा व धार्मिक मान्यता के अनुसार संकल्प करके दक्षिणाभिमुख हो शनि से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिये। ये वस्तुएं हैं – काला वस्त्र, साबुत काला उडद, काला तिल, सरसों का तेल, काली गाय या भैंस, काली चरण पादुकाएं (जुत्ते-चप्पल), लोहे के बर्तन आदि। लेकिन शनि अनुशासन प्रिय हैं, अच्छे बूरे कर्मों का फल अवश्य देते हैं अतः यही सोच कर जीवन जीना चाहिये।
शनि की साढ़ेसाती, शनि की अढ़ैया और शनि की महादशा से पीडि़त लोगों के लिए 28 मई का दिन खास है। इस दिन शनि जयंती है। ज्‍योतिषियों और पंडितों के मुताबिक शनि को खुश करने के लिए यह सबसे अच्‍छा दिन है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन शनि देव की जयंती शहर में धूमधाम से मनाई जा रही है। काशी के शनि मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए जुटे रहे।
यह अमावस्‍या तिथि मंगलवार की रात 11 बजकर 39 मिनट पर ही शुरू हो गई थी, जो 28 मई की रात 11 बजकर 32 मिनट तक जारी रहेगी। इस दिन गुप्त दान का विशेष महत्‍व है। ऐसी मान्‍यता है कि श्रृष्टि के संचालक प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य के पुत्र शनिदेव का तेल से अभिषेक करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
सरसों और तिल के तेल में देखें परछाईं और करें दान
उन्‍होंने बताया कि जिन लोगों पर शनि का प्रकोप चल रहा है, उनको सरसों या तिल का तेल साफ बर्तन में रखकर चेहरा देखना चाहिए। इस तेल को किसी शनि मंदिर में दान कर देना चाहिए। इस क्रिया को ज्योतिष शास्त्र में छाया दान कहते हैं। ग्रह दोष इस प्रक्रिया के करने से कट जाते हैं। शनिदेव को नीला पुष्प और काला छाता बहुत पसंद है। इस दिन हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चढ़ाना शुभ माना जाता है।

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