मोहम्मदी खीरी, 25 मई 2014 (आईपीएन)। विद्युत उपकेन्द्र में खडे़ लगभग तीन लाख रूपयों मूल्य के पेड़ों को बिना उच्चाधिकारियो की अनुममि प्राप्त किये चुपचुपाते चोरी से कटवा देने तथा अधूरी लकड़ी बरामद करने के बाद वन विभाग के द्वारा चल रही कार्यवाही जहां ठण्डे बस्ते में पहुंच गयी। वहीं विद्युत विभाग के उच्चाधिकारी लाखों रूपयों की हुई राजस्व हानि पर पूरी तरह आंखंे मूंदें हैं।
हाईडिल प्रांगण में इससे पूर्व शीशम, आम व अन्य प्रजातियांे के लगभग दो दर्जन पेड़ चोरी छुपे काटे जा चुके है। जिससे विभाग को लाखों रूपयों की राजस्व हानि हो चुकी है। इस बार मामला अखबारों की सुर्खियां बन जाने पर फंस गया। जिसे वन विभाग एवं विद्युत विभाग ने चुपचुपाते समझौता वार्ता कर मामले को दफन सा कर दिया। अब स्थिति ये हो गयी है कि विद्युत विभाग का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से साफ मना कर रहा है। वहीं वन विभाग के अधिकारी ‘‘अरे छोड़ों सात ही तो पेड़ कटे हैं’’ कह कर टाल रहे हैं। क्या कार्यवाही कर चुके हैं ये भी बताने को तैयार नहीं है?
नगर के एक सामाजिक कार्यकर्ता मुजीब अहमद सिद्दीकी ने इस पूरे प्रकरण को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अवगत कराया है। भ्रष्टाचार एवं उपभोक्ताओं को दोहन तथा विभाग को चूना लगाने में माहिर विद्युत विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी के द्वारा अभी तक बिजली से सम्बन्धित हेराफेरी करते आ रहे थे। हाल ही में स्थानीय अधिकारियों ने एक संविदाकर्मी के साथ मिलकर यूकलेप्टिस के सात पेड़ ठेकेदारों के अनुसार जिनकी कम से कम कीमत साढे़ तीन लाख रूपये होगी, उन्हे बिना उच्चाधिकारी की अनुमति लिये तथा बिना कोई औपचारिकताए पूर्ण किये ही कटवा दिया गया था। शिकायत होने पर वन रेंज अधिकारी ने भारी दलबल के साथ छापा मारा और चोरी से काटे गये सरकारी पेड़ों की कटी लकड़ी बरामद कर ली गयी थी। तीन चार दिन तक वन विभाग के अधिकारी एसडीओ, जेई, संविदाकर्मी तथा ठेकेदार के विरूद्ध एफआईआर दर्ज होगी कह कर प्रेस को गुमराह करते रहें।
अब वनाधिकारी दूसरा राग अलापने लगे हैं। वन रेंज अधिकारी कहने लगे है कि ‘‘अरे छोड़ों सात ही तो पेड़ है वो भी यूकलेप्टिस के। वहीं विद्युत विभाग के अधिकारी इस संदर्भ में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। नगर के सामाजिक कार्यकर्ता मुजीब ने प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित वन विभाग कन्जरवेटर, प्रमुख सचिव आदि को पत्र भेजकर कार्यवाही की मांग है। हाईडिल प्रागंण में इस प्रकार चोरी से पेड़ पहली बार नहीं काटे गये हैं। इससे पूर्व प्रागंण में खडे शीशम, आम सहित अन्य प्रजाति के लाखों रूपयों के पेड़ चोरी से काटे जा चुके हैं। जिन पर कोई हो हल्ला नहीं मचा। परिणाम स्वरूप इस बार भी नहीं मचेगा सोचकर पेड़ कटवा दिये गये। जिस पर हो हल्ला मच गया।

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