Jaswant_Singh_FILE_PTI_360ये कहावत जसवंत सिंह पर इकदम सटीक बैठ रही है। इंसान अपने ठिकाने को छोड़ कितना ही क्यों न इधर उधर भटक ले आखिर में आना अपने ठिकाने पर ही होता है। ऐसा ही कुछ करते नजर आ रहे हैं जसवंत। भाजपा से बगावत करने के बाद उन्हें कहीं ठिकाना नहीं मिला। अब फिर वापसी की राह चुन ली जसवंत सिंह ने।
लोकसभा चुनाव का टिकट न मिलने के बाद पार्टी से बगावत करके बाड़मेर से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले जसवंत सिंह ने शुक्रवार को लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की। इससे अटकलों का बाजार फिर गर्म हो गया। हालांकि बीजेपी सूत्रों का कहना है कि यह शिष्टाचार मुलाकात थी, लेकिन माना जा रहा है कि जसवंत सिंह इस मुलाकात के जरिए संकेत देना चाहते थे कि वह फिर पार्टी में लौटना चाहते हैं।
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि जसवंत शुक्रवार को लालकृष्ण आडवाणी से मिलने उनके निवास पर गए और वहां लगभग आधे घंटे तक उनके साथ रहे। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना है कि आडवाणी और जसवंत सिंह की यह शिष्टाचार मुलाकात थी, क्योंकि दोनों के बीच पुराने संबंध रहे हैं और वे आपस में मिलते रहते हैं। उनका यह भी कहना है कि पार्टी में लौटने के बारे में दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।
बीजेपी नेताओं में इस बात पर चर्चा है कि जसवंत सिंह अब पार्टी में लौटना चाहते हैं। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि जसवंत सिंह की चिंता खुद से ज्यादा बेटे को लेकर है। जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह को भी चुनाव के दौरान पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। गौरतलब है कि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया कर्नल सोना राम को बाड़मेर से टिकट देने के पक्ष में थीं जबकि जसवंत सिंह खुद यहीं से चुनाव लड़ना चाहते थे। इसी वजह से जसवंत सिंह ने टिकट न मिलने की वजह से बगावत करके बाड़मेर से निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन वे चुनाव हार गए थे।

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