देश में नई सरकार बनने की गहमागहमी के बीच दो दिन से तिहाड़ जेल में बंद अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को फिर कोर्ट में पेश किया जाएगा। जानकार मानते हैं कि उन्‍हें रिहाई के लिए जमानत लेनी होगी या निजी मुचलका भरना होगा। लेकिन, केजरीवाल जिन सिद्धांतों की दुहाई देते रहे हैं, उससे लगता नहीं कि वह ऐसा करेंगे। ऐसे में अभी उनके रिहा होने के आसार कम लग रहे हैं। इस बीच, केजरीवाल की मुश्किल और बढ़ रही है। आप के सांसद भगवंत मान ने कहा है कि अगर कोई बेल बॉन्‍ड नहीं भरता है तो उसे कानूनन जेल जाना ही होगा, इसमें कुछ गलत नहीं है। उनकी पार्टी के बड़े नेता किसी न किसी रूप में उनसे दूर नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्‍या क्‍या केजरीवाल को अपनी ही पार्टी के सदस्‍यों से समर्थन नहीं मिल रहा है?
नहीं पहुंचे विधायक
बीते कुछ दिन के घटनाक्रम पर नजर डालें तो ऐसा ही लगता है। बीजेपी नेता नितिन गडकरी के मानहानि के मामले में केजरीवाल को जेल भेजे जाने के बाद पार्टी ने जेल के बाहर बुधवार को प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को इसमें पहुंचने के लिए कहा गया था लेकिन सिर्फ 150 के करीब लोग ही पहुंचे। यहां तक कि पूरे विधायक भी नहीं आए। पार्टी की हुई इस किरकिरी के मद्देनजर आप के बड़े नेताओं ने गुरुवार को धरना-प्रदर्शन से जुड़ी रणनीति ही बदल दी। पार्टी नेताओं ने तय किया कि अब घर-घर जाकर लोगों को बताया जाएगा कि केजरीवाल ने जमानत क्‍यों नहीं ली।
बड़े नेता हैं दूर
आप के बड़े नेता कुमार विश्‍वास अमेठी में राहुल गांधी से मिली हार और जमानत जब्‍त होने के बाद से ही 10 दिन के एकांतवास पर चले गए हैं। उन्‍होंने इस बारे में अपने फेसबुक पेज पर जानकारी दी थी। ऐसे वक्‍त में जब दिल्‍ली में पार्टी खुद को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है, विश्‍वास का गायब होना सवाल खड़े कर रहा है।
एक अन्‍य नेता शाजिया इल्‍मी के भी कम नजर आने को लोग पार्टी में उपजे असंतोष के दौर पर देख रहे हैं।
aapवहीं, मनीष सिसौदिया के पिता की मृत्यु होने के चलते वह भी केजरीवाल की मुश्किल घड़ी में साथ नहीं निभा पाए।

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