हरियाणा के करनाल में किसान नेताओं और पुलिस-प्रशासनिक अफसरों के बीच बुधवार को सवा तीन घंटे चली वार्ता विफल रही और गुरुवार को भी ये धरना जारी है. उधर मिनी सचिवालय पर जारी किसानों के धरने को देखते हुए आज यानी 9 सितंबर को भी करनाल जिले में मोबाइल इंटरनेट और SMS सेवाएं बंद रखने के आदेश हरियाणा सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से जारी किए गए हैं. कल दो दौर की वार्ता हुई जिसमें प्रशासन की तरफ से डीसी-एसपी ने और रेंज कमिश्नर ने बातचीत की थी.
किसानों की संख्या देखते हुए हरियाणा गृह मंत्रालय ने फिलहाल सुरक्षा की दृष्टि से मोबाइल इंटरनेट और बल्क SMS सेवा को आज भी बंद रखने का फैसला लिया है. उधर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने प्रशासन ने दो राउंड की वार्ता के बाद बुधवार को कहा कि हमारी मांग थी कि IAS आयुष सिन्हा को सस्पेंड कर केस दर्ज किया जाए. प्रशासनिक टीम केस दर्ज करना तो दूर सस्पेंड करने के लिए भी तैयार नहीं है. टिकैत ने कहा कि हमारा एक मोर्चा दिल्ली बॉर्डर पर है और अब दूसरा करनाल सचिवालय पर जारी रहेगा.
किसान पीछे हटने के मूड में नहीं
बुधवार रात को भी किसान करनाल मिनी सचिवालय के सामने डटे रहे और गुरुद्वारों के जरिए लंगर की व्यवस्था की गई. किसान नेताओं ने कहा कि जिला सचिवालय पर किसान डटे रहेंगे. अफसरों को मुख्य गेट से नहीं जाने देंगे, वे चाहे किसी रास्ते या फिर दीवार कूद कर सचिवालय के भीतर जाएं. हालांकि आम आदमी को परेशानी न हो इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा. वार्ता के बाद किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम चढूनी और योगेंद्र यादव ने प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि किसानों की मांगों पर प्रशासन विचार करने के लिए भी तैयार नहीं है.
क्यों प्रदर्शन कर रहे हैं किसान?
बता दें कि 28 अगस्त को पुलिस ने बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों पर लाठीचार्ज किया था. इस लाठीचार्ज में रायपुर जाटान गांव के किसान सुशील काजल की मौत हो गई थी. इसके विरोध में किसानों ने 7 सितंबर को करनाल अनाज मंडी में महापंचायत बुलाई थी. 3 दौर की वार्ता के दौरान किसान नेता सिर फोड़ने का आदेश देने वाले तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा के निलंबन पर अड़े हुए हैं लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है. साथ ही किसान मृतक और घायल किसानों के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं.
बातचीत से हल के पक्ष में सरकार
बुधवार को उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने कहा कि बातचीत से इस मसले का समाधान निकालने का प्रयास जारी है. आंदोलनकारी लाठीचार्ज करवाने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं. सरकार बिना जांच के कोई कार्रवाई नहीं करने के पक्ष में है. आंदोलनकारियों ने बैठक में आश्वासन दिया कि वह धरने को शांतिपूर्ण तरीके से चलाएंगे, प्रशासन भी धैर्य, संयम व सूझबूझ से काम ले रहा है. किसानों ने बुधवार को निर्मल कुटिया और जाट भवन होकर सचिवालय जाने वाले रास्ते पर लगाए बैरिकेड हटवा दिए थे. हजारों किसान बसताड़ा टोल पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में सचिवालय का घेराव कर धरने पर बैठे हैं. धरनास्थल पर किसानों ने टेंट गाड़ लिए हैं और लंगर भी शुरू कर दिया है. लघु सचिवालय के गेट पर पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस के जवान तैनात हैं.

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