टोक्यो पैरालिंपिक्स (Tokyo Paralympics) के जैवलिन थ्रो (Javelin Throw) इवेंट में भारत रियो वाली कामयाबी तो नहीं दोहरा सका, पर मेडल जीतने में कामयाब जरूर रहा. जैवलिन थ्रो में भारत के तीन एथलीट ने शिरकत किया था, जिनमें रियो के गोल्ड मेडलिस्ट देवेंद्र झाझड़िया (Devendra Jhajharia) के अलावा अजीत सिंह और सुंदर सिंह गुर्जर (Sundar Singh Gurjar) शामिल थे. इनमें दो जैवलिन थ्रोअर भारत के लिए मेडल जीतने में कामयाब रहे. देवेंद्र झाझड़िया ने 64.35 मीटर की दूरी तक भाला फेंकते हुए देश के लिए सिल्वर मेडल जीता तो सुंदर सिंह गुर्जर ने 64.01 मीटर तक भाला फेंककर कांसा जीता. मतलब रियो की तरह गोल्ड तो जैवलिन में भारत की झोली में टोक्यो में नहीं गिर सका. पर डबल धमाल जरूर देखने को मिला.
पुरुषों के जैवलिन थ्रो इवेंट का गोल्ड मेडल श्रीलंका के हेराथ के नाम रहा, जिन्होंने 67.79 मीटर की दूरी नापते हुए नया वर्ल्ड रिकॉर्ड और पैरालिंपिक्स रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने इस मामले में भारत के देवेंद्र झाझड़िया का रियो पैरालिंपिक्स में कायम किया वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा. हेराथ का जीता गोल्ड टोक्यो पैरालिंपिक्स में श्रीलंका की झोली में गिरा पहला मेडल भी है.

सुस्त शुरुआत के बाद सिल्वर जीतने में कामयाब देवेंद्र
टोक्यो पैरालिंपिक्स में देवेंद्र झाझड़िया से भारत को गोल्डन जीत की आस थी. लेकिन इस बार श्रीलंका के हेराथ एक नए पैरालिंपिक्स चैंपियन की तरह सामने आए. फाइनल में देवेंद्र का आगाज सुस्त रहा पर फिर वो अपने लिए सिल्वर मेडल पक्का करने में कामयाब रहे. वहीं देश को कांसा यानी ब्रॉन्ज दिलाने वाले सुंदर सिंह गुर्जर शुरू से ही टॉप फोर में बने रहे. एक बार तो वो सिल्वर मेडल के दावेदार भी बनते दिखे. लेकिन फिर हमवतन देवेंद्र ने उन्हें तीसरे नंबर पर धकेल दिया.

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