परिवहन विभाग के बाराबंकी एआरटीओ राहुल श्रीवास्तव ने बाराबंकी बस हादसे में एनएचएआई के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। तहरीर में आरोप लगाया है कि लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर बस खराब होने के बाद करीब चार घंटे तक कल्याणी नदी के पुल पर ही खड़ी रही। एनएचएआई के टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने न तो पेट्रोलिंग की न ही कोई मदद पहुंचाई।
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में मंगलवार आधी रात हुए हादसे के मामले में एआरटीओ ने हादसे को लेकर एनएचएआई के अधिकारियों के खिलाफ तहरीर देकर एफआईआर दर्ज करवाई है। एआरटीओ ने रामसनेहीघाट थाना क्षेत्र में स्थित कल्याणी नदी के पुल पर हुए भीषण हादसे के लिए एनएचएआई के अधिकारियों को जिम्मेदार बताया है। एआरटीओ का आरोप है कि खराब होने के बाद बस हाईवे पर घंटों खड़ी रही। जबकि उसे वहां से हटाने जिम्मेदारी एनएचएआई की थी। बता दें कि इस बस हादसे में 18 यात्रियों की मौत और 16 गंभीर रूप से घायल हुए थे।
हादसे की शिकार हुई बस का हो चुका 32 बार चालान
हादसे का शिकार हुई डबल डेकर बस (यूपी 22 टी 7918) का बीते चार वर्षों के दौरान 32 बार चालान हो चुका है। वहीं अंतरराज्यीय बसों के संचालन पर प्रतिबंध होने के बावजूद यह बस पंजाब से वाया यूपी बिहार जा रही थी। कोरोना काल में इंटरस्टेट बसों का संचालन बंद है। सिर्फ दिल्ली और उत्तराखंड के बीच बस संचालन को अनुमति शासन की ओर से दी गई है। ऐसे में बाराबंकी के पास हुए बस हादसे में बस पंजाब से मजदूर लेकर बिहार जा रही थी।
85 की क्षमता, मारपीट बैठा दिया 140 सवारियां
हादसे से बचे मजदूरों ने बताया कि किस प्रकार तीन बसों की सवारी एक में ही जबरन लाठी-डंडे के बल पर बैठाकर भेजा गया। स्लीपर डबल डेकर बस की क्षमता 85 सवारियों की थी मगर मारपीट कर उसमें 140 लोगों को बैठा दिया गया।

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