सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय की जमानत याचिका खारिज कर दी है। सुब्रत रॉय ने न्यायिक हिरासत में रखने के कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें जेल में रखना गैरकानूनी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि उन पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और निवेशकों के पैसे की वसूली के लिए उन्हें हिरासत में रखना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख से कहा कि वो अपनी जमानत के लिए नया प्रस्ताव पेश करें और बताएं कि निवेशकों के पैसे कैसे लौटाएंगे।
गौरतलब है कि सुब्रत राय को निवेशकों का लगभग 20 हज़ार करोड़ रुपए लौटाना है। इससे पहले सहारा ग्रुप ने ये पेशकश की थी कि अगर सुब्रत राय को रिहा किया गया तो वो एक साल के अंदर पांच किश्तों में सारा पैसा SEBI में जमा करा देंगे।
सहारा पर फर्जी तरीके से दो रिहायशी स्कीम के जरिए निवेशकों से पैसा उठाने का आरोप है। गौरतलब है कि सुब्रत राय 4 मार्च से दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। कोर्ट ने पहले यह शर्त रखी थी कि अगर दस हजार करोड़ रुपए में से पांच हजार करोड़ रुपए की बैंक गारंटी और पांच हजार करोड़ रुपए नकद जमा करा दिया जाए तो सुब्रत राय को जमानत पर छोड़ दिया जाएगा।
सहारा समूह ने कोर्ट से अपील की है कि राय को रिहा किया जाए ताकि वह कोर्ट के आदेश पर अमल करने के इरादे से धन की व्यवस्था के लिए लोगों से बातचीत कर सके। समूह ने पिछले साल 21 नवंबर से उसके बैंकों के खातों पर लगी रोक भी खत्म करने का अनुरोध किया है।sahra

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