सुनने में आपको अटपटा लगेगा। गुस्सा भी आ सकता है, लेकिन जो कुछ लिखा जा रहा है, वह जुबानी नहीं बल्कि लिखा-पढ़ी में भी सच है। नगरनिकाय चुनाव में राजधानी के वार्डों में आरक्षण का अक्षर जुडऩे के बाद अजब-गजब नाम पढऩे-लिखने में सामने आ रहे हैं। महत्वपूर्ण शख्सियत और महत्वपूर्ण जगहों के नाम पर रखे वार्डों को आरक्षण की जिस श्रेणी में रखा गया है, उसका नाम आगे लिखने से यह अटपटा संयोग राजनीतिक दलों के बयान से लेकर प्रत्याशियों के प्रचार तक में दिखाई देेने लगा है।

वार्डों के नाम में आरक्षण का अक्षर जुडऩे से किस तरह अजब-गजब नाम सामने आ रहे हैं, आप अब बानगी खुद देखिए। नगरनिगम लखनऊ का वार्ड नम्बर 6 को शहीद भगत सिंह का नाम दिया गया है, यह वार्ड पिछड़ी वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित है। राजधानी में कांग्रेस प्रत्याशी ने उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें वार्ड का नाम आरक्षण के अक्षरों के जोड़ के बाद बना दिया है, शहीद भगत सिंह पिछड़ा वर्ग महिला। इसी तरह राजा बिजली पासी, लाला लाजपतराय पिछड़ा वर्ग महिला बन गया है। वार्ड नम्बर 48 महात्मा गांधी के नाम पर है, आरक्षण के बाद महात्मा गांधी महिला नाम से लिखा-पढ़ी में सामने आ रहा है। महात्मा गांधी के अलावा बाबू जगजीवन राम, आचार्य नरेंद्र देव, राजीव गांधी, मैथलीशरण गुप्ता के नाम पर रखे गए वार्ड में अब महिला जोड़ दिया गया है।

देश में महापुरुषों की कमी नहीं है, लेकिन वार्डों के परिसीमन के बाद और महापुरुषों के नाम पर वार्ड का नामकरण करने की बजाए कुछ महापुरुषों को दो भाग करके वार्ड बना दिया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, राजीव गांधी हमारे दिलों में एक ही है, लेकिन नगरनिगम के वार्ड सूची में अब दो-दो हो गए हैं। वार्ड नम्बर आठ लाल बहादुर शास्त्री प्रथम अनारक्षित है तो वार्ड नम्बर 58 लाल बहादुर शास्त्री द्वितीय पिछड़ा वर्ग हो गया है। वार्ड नम्बर 36 राजीव गांधी प्रथम महिला तो वार्ड नम्बर 81 राजीव गांधी द्वितीय भी महिला है। ऐसा मौलाना कब्ले आबिद के साथ भी हुआ है। उनके नाम पर वार्ड नम्बर 108,109 रखा गया है।

महापुरुषों के नाम के आगे आरक्षण के अक्षर जुडऩे से जो अटपटा लग रहा है, वैसा ही कुछ इलाकों के नाम के आगे भी सरकारी दस्तावेज से लेकर राजनीतिक दलों के प्रेसनोट तक में लिखकर आ रहा है। जैसे हजरतगंज अनुसूचितजाति, गोमतीनगर महिला, लालकुंआ अनुसूचित जाति, मौलवीगंज पिछड़ावर्ग महिला आदि। आरक्षण के शब्द जुडऩे के बाद महापुरुषों के नाम पर रखे गए वार्ड जिस तरह अजब-गजब हुए हैं, उससे कुछ महापुरुष बच भी गए हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महाकवि जयंशकर प्रसाद, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, जेसी बोस, इंदिरा प्रियदर्शिनी, रानी लक्ष्मीबाई नाम पर रखे गए वार्ड अनारक्षित है।

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