कलकत्ता उच्च न्यायालय ने चुनाव के बाद बंगाल में भड़की हिंसा को शुक्रवार को बेहद गंभीरता के साथ लेते हुए बंगाल सरकार को फटकार लगाई है. चुनाव के बाद की हिंसा पर कोलकाता हाईकोर्ट की 5 सदस्यीय बेंच ने जादवपुर के डीएम, पुलिस प्रमुख/एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा कि आखिर उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए.
पुलिस को चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ितों के सभी मामले दर्ज करने के आदेश दिए हैं. बीजेपी नेता अभिजीत सरकार का दूसरा पोस्टमार्टम कमांड अस्पताल कोलकाता में करने का आदेश दिया गया है. राज्य के मुख्य सचिव ने चुनाव के बाद हुई हिंसा से संबंधित सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा के कारणों की एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया. न्यायमूर्ति विनीत सरन की अगुवाई वाली पीठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें चुनाव के बाद हुई हिंसा की एसआईटी जांच के निर्देश देने की मांग की गई थी.
इस बीच, लाइव लॉ ने बुधवार को बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने हिंसा के कारण लोगों के विस्थापन के खिलाफ शिकायतों के संबंध में कलकत्ता उच्च न्यायालय को एक संक्षिप्त रिपोर्ट सौंपी है. अदालत ने रिपोर्ट की जांच के लिए मामले को 2 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया है. पिछले हफ्ते,  उच्च न्यायालय ने 18 जून के आदेश को वापस लेने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की एक याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उच्च न्यायालय की पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने एनएचआरसी के अध्यक्ष को कथित के सभी मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था.
अदालत के आदेशों के बाद, 21 जून को, NHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण मिश्रा ने पूर्व खुफिया ब्यूरो प्रमुख राजीव जैन की अध्यक्षता में पैनल का गठन किया था. हालांकि, एनएचआरसी टीम को मंगलवार दोपहर जादवपुर में कथित तौर पर मारपीट और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ा. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष, आतिफ रशीद, जो टीम के साथ थे, ने कहा कि भीड़ ने उन्हें मारने और उनका पीछा करने की कोशिश की थी, और उनके साथ आए पुलिस कर्मियों ने कोई मदद नहीं की थी.

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