नई दिल्ली: देश के 11 राज्यों में कोरोना के डेल्टा प्लस वेरिएंट के 48 मामले मिले हैं. सरकार ने कहा कि महाराष्ट्र से पहचाने गए 21 मामलों का प्रसार बहुत लोकलाइज्ड है. महाराष्ट्र में अबतक सबसे ज्यादा कोविड संक्रमण के मामले सामने आए हैं.
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ बलराम भार्गव ने कहा है कि डेल्टा-प्लस 12 देशों में मौजूद है. वेरिएंट ऑफ कंसर्न के केसेज का अनुपात मई के 10.3 प्रतिशत से बढ़कर जून में 51 प्रतिशत हो गया है. हालांकि भार्गव ने कहा कि लैब के निष्कर्षों से पता चलता है कि कोवैक्सीन और कोविशील्ड दोनों अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हैं.कोवैक्सीन से एंटीबॉडी के स्तर को बेअसर करने में तीन गुना कमी और कोविशील्ड में दो गुना कमी आई है. फाइजर और मॉडर्न वैक्सीन में कमी कम से कम सात गुना है. उन्होंने कहा कि इनकी तुलना सही नहीं हो सकती है क्योंकि टीकों में प्रभावकारिता के विभिन्न स्तर होते हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से संक्रमण जल्द रोकने के उपाय करने को कहा
महाराष्ट्र के अलावा कई अन्य राज्यों में भी यह नया वेरिएंट पाया गया है. इनमें मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, राजस्थान और कर्नाटक शामिल हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को इन राज्यों को स्पेसिफिक जिलों में भीड़, लोगों के ज्यादा आपसी मेल-मिलाप को को रोकने, व्यापक टेस्टिंग,  जल्दी ट्रेसिंग के साथ-साथ टीकाकरण कवरेज सहित रोकथाम के उपायों को तुरंत आगे बढ़ाने के लिए कहा है.
डेल्टा प्लस वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की प्रभावशीलता का टेस्ट
INSACOG की जीनोम सीक्वेंसिंग रिपोर्ट के अनुसार, डेल्टा-प्लस वेरिएंट, जिसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न (VoC) के रूप में कैटेगराइज किया गया है, इसने संचरण क्षमता, फेफड़ों की कोशिकाओं के रिसेप्टर्स के लिए स्ट्रॉन्ग बाइडिंग और मोनोक्लोनल एंटीबॉडी रिस्पॉन्स में संभावित कमी को बढ़ाया है. अधिकारियों ने कहा कि नए डेल्टा-प्लस संस्करण के कारण संक्रमण,  बीमारी की गंभीरता, पुन: संक्रमण और टीकों, दवाओं की प्रभावकारिता की निगरानी के लिए आगे की इंवेस्टिगेशन जारी है. भार्गव ने कहा कि ” डेल्टा-प्लस वेरिएंट के खिलाफ टीकों की प्रभावशीलता का भी टेस्ट किया जा रहा है और परिणाम 7-10 दिनों में आने की उम्मीद है.”

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