लखनऊ: यूपी एटीएस ने धर्मान्तरण के मामले में जिन दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया है, उनसे पूछताछ में नए खुलासे हुए हैं. जानकारी के अनुसार, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सोशल फेस बनकर काम करने वाली सोशल डेमोक्रेटिव पार्टी ऑफ इंडिया पर शिकंजा कसने के बाद इस्लामिक दावा सेंटर को खड़ा किया गया था. भारत में दबदबे के लिए धर्मान्तरण का काम किया जा रहा है. जनसंख्या बढ़ाने को लेकर यह संस्था हिंदू छात्रों और महिलाओं का धर्म परिवर्तन करवाने के साथ घुसपैठ भी करा रही है. इसे ISI समेत कई इस्लामिक देशों से फंड भी मुहैया कराया जा रहा है. एटीएस अब इन गिरोह पर पैनी नजर रखे हुए है. सरकार ने भी इनसे सख्ती से निपटने के निर्देश दिए हैं.
वर्ष 2050 तक दुनिया में सबसे ज़्यादा मुसलमान आबादी वाला देश बनेगा भारत
वॉशिंगटन स्थित प्यू रिसर्च सेंटर के एक नए शोध के अनुसार, वर्ष 2050 तक भारत इंडोनेशिया को पीछे छोड़ पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा मुसलमान आबादी वाला देश बन जाएगा. इतना ही नहीं शोध में कहा गया है कि पूरी दुनिया में मुसलमानों और ईसाइयों की आबादी लगभग बराबर हो जाएगी. वॉशिंगटन स्थित प्यू रिसर्च सेंटर का कहना है कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आबादी हिंदू धर्म मानने वालों की होगी. भारत में हिंदुओं का बहुमत बना रहेगा. अगले चार दशकों में ईसाई धर्म सबसे बड़ा धार्मिक समूह बना रहेगा, लेकिन किसी भी धर्म के मुक़ाबले इस्लाम सबसे तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ेगा. ATS सूत्रों की मानें तो जनसंख्या बढ़ाने के लिए ISI समेत कई इस्लामिक देशों से फंड दिया जा रहा है.

दो साल में 18 बच्चों के हुए धर्मान्तरण, जांच एजेंसियों को भनक तक नहीं

2 साल में 18 मूक बधिर बच्चों के धर्मांतरण हुए, लेकिन जांच एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी. इस पूरे प्रकरण में भारत की जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने जांच एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. जांच में सामने आया कि नोएडा डेफ सोसाइटी स्कूल आठ कमरों के मकान में चल रहा है. इसकी स्थापना 2005 में हुई थी. मौजूदा समय मे यहां 35 बच्चों का पंजीकरण है, जिसमें 12 बच्चे जम्मू-कश्मीर के मुस्लिम परिवार से हैं. नोएडा से ही संचालित इस्लामिक दावा सेंटर ने नोएडा डेफ सोसाइटी के 18 मूक बधिर बच्चों का 2 साल के भीतर धर्मान्तरण करवा दिया और जांच एजेंसियों और स्कूल प्रबंधन को इसकी भनक भी नहीं लगी. इस इनपुट के बाद एटीएस का शक गहराया. अब एटीएस नोएडा डेफ सोसाइटी की प्रबंधक रूमा रोका को लखनऊ स्थित यूपी एटीएस के मुख्यालय लाकर पूछताछ कर रही है. इसके साथ ही चार अन्य लोग भी एटीएस की हिरासत में हैं. हालांकि रूमा रोका का कहना है कि बच्चे कैसे इस संस्था के जाल में फंसकर इस्लाम धर्म स्वीकार कर रहे थे, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

एटीएस ने कसा शिकंजा, पूछताछ जारी

एटीएस अफसरों के मुताबिक, नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन में पहली बार सोशल डेमोक्रेटिव पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) का चेहरा सामने आया था. अफसरों के मुताबिक, एसडीपीआई सिमी समर्थित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सोशल और पोलिटिकल फेस है. यह संस्था पीएफआई के लिए दुनिया भर के इस्लामिक देशों से फंड जुटाती है. 2019 में सीएए के विरोध में हुई हिंसा में पीएफआई सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद एसडीपीआई का खुलासा हुआ था. इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियों की नजर इस संगठन पर लगातार बनी हुई है. इसकी वजह से विदेशी फंड जुटाने के लिए दो साल पहले इसकी जगह दावा इस्लामिक सेंटर बनाया गया. इस संस्था को फंड जुटाने के साथ हिंदुओं का धर्मान्तरण करवाने का भी टास्क दिया गया था. एटीएस अफसरों का कहना है कि मामले की तह तक जाने के लिए उमर और जहांगीर की रिमांड ली जाएगी.

बरेली में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा

बीते 30 नवंबर को उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक युवती के पिता की शिकायत पर बरेली जिले में देवरनियान पुलिस स्टेशन में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत अपना पहला मामला दर्ज किया था. मुकदमे में शरीफ नगर गांव के निवासी टीकाराम ने केस दर्ज कराया है, जिन्होंने उसी गांव के एक शख्स उवैश अहमद पर बहला-फुसलाकर अपनी बेटी का धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश करने का आरोप लगाया था. आईपीसी और नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत उवैश अहमद के खिलाफ एक केस दर्ज किया गया है.

एटीएस की कार्रवाई में खुलासे से मची सनसनी

ATS ने बीते सोमवार को मौलाना मुफ़्ती काजी जहांगीर आलम और उमर गौतम को नोएडा से गिरफ्तार किया था. दोनों हिंदू महिलाओं और मूक बधिर छात्रों को बरगलाकर और तरह-तरह के प्रलोभन देकर इस्लाम धर्म स्वीकार करवा रहे थे. शुरुआती जांच में सामने आया था कि दोनों मौलाना ने नोएडा स्थित मूक बधिर बच्चों को पढ़ाने वाली संस्था नोएडा डेफ सोसाइटी के बच्चों को प्रलोभन देकर उनका धर्मान्तरण करवा रहे हैं. एटीएस को कानपुर और गुरुग्राम के दो छात्रों के बारे में जानकारी भी मिली, जिनके अभिभावकों की जानकारी के बिना उनके बच्चों का धर्म परिवर्तित करवाकर इस्लाम के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए उन्हें दक्षिण भारत भेजा गया था.

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