हैदराबाद: देश इस वक्त जानलेवा कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जंग लड़ रहा है. हालांकि अब नए मामलों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है. लेकिन मौतें अभी भी बड़ी संख्या में हो रही है. इस बीच एक स्टडी से खुलासा हुआ है कि स्वदेशी रूप से विकसित कोरोना वायरस की वैक्सीन कोवैक्सिन लोगों को घातक बीटा (बी.1.351) और डेल्टा (बी.1.617.2) वेरिएंट से बचाती है. बीटा को आमतौर पर दक्षिण अफ्रीकी और डेल्टा को भारतीय वेरिएंट के रूप में जाना जाता है.
एंटीबॉडी को बेअसर करने की एकाग्रता में पाई गई कमी
कोवैक्सिन की न्यूट्रलाइजेशन क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए किए गए शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि बीटा और डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ न्यूट्रलाइजेशन टाइटर्स (एंटीबॉडी को बेअसर करने की एकाग्रता) में तीन गुना कमी पाई गई. यानि कोवैक्सीन बीटा और डेल्टा वेरिएंटस के खिलाफ एंटीबॉडी को बनाए रखने में मदद करती है.
एनआईवी, आईसीएमआर और भारत बायोटेक के शोधकर्ताओं की तरफ से एक अध्ययन किया गया था. जिसे biorxiv नाम की एक वेबसाइट पर अपलोड किया गया. ये वेबसाइट कोरोना और वैक्सीन पर होने वाले अध्ययनों को पब्लिश करती है.
कौन कर रहा है कोवैक्सीन का निर्माण
बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोविशील्ड टीके का निर्माण कर रही है. वहीं हैदराबाद स्थित कंपनी भारत बायोटेक, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) के साथ तालमेल से कोवैक्सीन का निर्माण कर रही है. अध्ययन में शामिल होने वालों के खून के नमूनों में एंटीबॉडी और इसके स्तर की जांच की गई.
क्या है डेल्टाकिसने दिया नाम?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सबसे पहले भारत में पाए गए कोरोना वायरस के स्वरूपों बी.1.617.1 और बी.1.617.2 को क्रमश: ‘कप्पा’ और ‘डेल्टा’ नाम दिया है. डेल्टा वैरिएंट ‘अल्फा’ वैरिएंट से भी ज्यादा खतरनाक है. डेल्टा (बी.1.617.2) अल्फा (बी.1.1.7) वेरिएंट की तुलना में 50 फीसदी तेजी से फैलता है. भारत में कोरोना का डेल्टा सबसे प्रमुख वैरिएंट है. पिछले साल अक्टूबर में भारत में पाए जाने वाले स्ट्रेन (B.1.617.1) को ‘कप्पा’ नाम दिया गया था.

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