केंद्र और ममता सरकार के बीच जारी तनातनी के बीच राज्य के पूर्व चीफ सेक्रेटरी अलपन बंदोपाध्याय ने भारत सरकार को नोटिस का जवाब भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि उन्होंने वही किया जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें निर्देश दिया। अलपन ने आगे जवाब देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री के साथ निर्धारित बैठक वाले दिन वे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ थे और उत्तर-दक्षिण 24 परगना में हवाई सर्वेक्षण कर रहे थे। अलपन ने कहा कि वे इस दौरान मुख्यमंत्री के निर्देश पर यास तूफान प्रभावित क्षेत्र दीघा भी गए थे।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने चक्रवाती तूफान यास से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद बंगाल में एक बैठक बुलाई थी और इस बैठक में अलपन बंदोपाध्याय को भी शामिल होने को कहा गया था लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद केंद्र सरकार ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए तीन दिन के भीतर उनसे बैठक में शामिल ना होने का कारण मांगा था। इतना ही नहीं इसके बाद केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने अलपन को दिल्ली बुलाया, लेकिन ममता बनर्जी ने उन्हें दिल्ली नहीं भेजा।
केंद्र ने आपदा प्रबंधन एक्ट की धारा 51(b) के तहत भेजा था नोटिस
केंद्र ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय आपदा प्रबंध प्राधिकरण के चेयरमैन भी हैं और अलपन बंदोपाध्याय की ये हरकत कानूनी तौर पर दिए गए दिशा निर्देशों के खिलाफ थी। इसलिए अलपन बंदोपाध्याय को आपदा प्रबंधन एक्ट की धारा 51(b) के तहत नोटिस भेजा गया और तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया।
ममता ने चला था बड़ा दांव
केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय के दिल्ली तबादले और उन्हें सोमवार को दिल्ली पहुंचने के आदेश की अवज्ञा करने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा दांव चला था। ममता बनर्जी ने अलपन के रिटायर होने के बाद उन्हें अपना सलाहकार नियुक्त कर लिया। वे अगले तीन साल तक पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार रहेंगे।
1987 बैच के आईएएस रहे थे बंदोपाध्याय
अलपन बंदोपाध्याय 1987 बैच के आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। वे ममता बनर्जी को हमेशा ‘मैडम सीएम’ कह कर पुकारते हैं और यहां तक कि बैठक में सीएम के आने पर वह कुर्सी से खड़े हो जाते हैं। हालांकि सीएम ममता बनर्जी उन्हें इसके लिए कई बार टोक चुकी हैं कि वे ऐसा न किया करें। बंदोपाध्याय नियमों का पालन करने वाले अधिकारी हैं और उनके प्रशासकीय अनुभव की ममता भी दाद देती हैं।

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