लखनऊ। श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान एनआईडीएम, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन पर तीन दिवसीय एफडीपी सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान एनआईडीएम द्वारा शिक्षा प्रदान करने, शोध/ अध्ययन को बढ़ावा देने, आपदा प्रबंधन हेतु क्षमता निर्माण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के संदर्भ में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के बाद सामूहिक कदम की दिशा में आयोजित यह पहली औपचारिक गतिविधि है इस कार्यक्रम का आयोजन आपदा जोखिम न्यूनीकरण के संदर्भ में प्रधानमंत्री के 10 सूत्रीय एजेंडे के अंतर्गत बिंदु संख्या 1,4,5 एवं 8 को दृष्टिगत करते हुए किया गया।
प्रोफेसर अनिल के गुप्ता विभागाध्यक्ष ई सी डी आर एम, एनआईडीएम ने कार्यक्रम के स्वागत भाषण में कहा कि आपदा जोखिम का अनुमान लगाने के लिए भवन की संरचनात्मक शक्ति की अवधारणा से इतर सिक बिल्डिंग सिंड्रोम की अवधारणा के संदर्भ में विचार करने एवं अभ्यास का समय है जोकि आपदा प्रबंधन हेतु दूसरी पीढ़ी का प्रतिमान हो सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने इस तथ्य पर पर बल दिया कि हमें अब प्रकृति को पुनः देने की बात सोचनी चाहिए अरब सागर में चल रहे चक्रवात ताऊते के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने बंगाल की खाड़ी में आकार ले रहे एक अन्य चक्रवात के बारे में चेतावनी दी जो आगामी कुछ दिनों में उड़ीसा के तटवर्ती क्षेत्रों में आ सकता है इस श्रंखला में डॉक्टर अजय प्रकाश प्रतिकुलपति श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय ने अपने उद्घाटन भाषण में अवगत कराया कि कैसे सुपर साइक्लोन ताऊते ने ढांचागत सुविधाओं को अत्यधिक प्रभावित किया है एवं कोविड महामारी ने मानव जीवन को।
उन्होंने यह भी कहा कि वैज्ञानिक प्रगति एवं पूर्वानुमान तकनीकों से ऐसे आपदाओं के विरुद्ध व्यवस्थित तत्परता ने हमारी सहायता की है उन्होंने यह भी कहा कि वहां कोविड महामारी के चरण 1 एवं चरण 2 के दौरान भारत में आपदा तत्परता उपायों के अंतर एवं प्रभाव का विश्लेषण किया । उन्होंने पाठ्यक्रम में आपदा प्रबंधन को जोड़े जाने की आवश्यकता पर बल दिया एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में शैक्षणिक विकास को कैसे प्रोत्साहित करेगी इस विषय पर चर्चा करी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर डॉक्टर ए.के.सिंह, कुलपति श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं आपदा प्रबंधन के संदर्भ में सुधारात्मक उपायों के स्थान पर निवारक उपायों पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया उन्होंने आगे कहा कि हमें प्रकृति के साथ छेड़छाड़ न करते हुए पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना चाहिए अन्यथा हमें आपदाओं हेतु तैयार रहना होगा।
उन्होंने इस दिशा में अधिक शोध एवं अध्ययन के द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं आपदा प्रबंधन की संभावनाओं का पता लगाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला । इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में विभिन्न विषयों जैसे आपदा प्रबंधन एवं भारत में संस्थागत तंत्र, सिविल इंजीनियरिंग एवं आपदा प्रबंधन, आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका, डीआरआर हेतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार, आपदाओं के प्रति वित्तीय तत्परता, आपदा के पश्चात मानसिक एवं सामाजिक देखभाल: भारत में मुद्दे एवं चुनौतियां, महिलाएं एवं डीआरआर, आपदा प्रबंधन में मानसिक स्वास्थ्य इत्यादि पर तकनीकी प्रस्तुतियां होनी हैं।
इस तीन दिवसीय कार्यक्रमों में प्रख्यात विषय विशेषज्ञ जैसे प्रोफेसर चंदन घोष, विभागाध्यक्ष, आर आई डी, एनआईडीएम, डॉक्टर अरुण ऐ. शा, वाइल्डलाइफ एसओएस, बेंगलुरु, प्रोफेसर गिरीश सी मिश्रा, संकाय अध्यक्ष, ओपीजे विश्वविद्यालय, रायगढ़, श्री आशीष पांडा, सलाहकार और संकाय सदस्य, इसीडीआरएम, एनआईडीएम, इंजीनियर अवधेश कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर इन्वर्टिस विश्वविद्यालय, डॉक्टर राजलक्ष्मी श्रीवास्तव एसोसिएट प्रोफेसर, एसआरएमयू, डॉ अमित सिन्हा, एसआरएमयू के सत्र होंगे । इस कार्यक्रम में तमिलनाडु, केरल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं आसाम आदि सहित पूरे भारत से 750 सौ से अधिक प्रतिभागी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर अनुश्री सिंह, एसआरएमयू एवं समन्वयन डॉक्टर राजलक्ष्मी श्रीवास्तव एवं डॉक्टर अमित सिन्हा एसआरएमयू, श्री आशीष पांडे सलाहकार और संकाय सदस्य इसीडीआरएम, एनआईडीएम द्वारा किया गया। कुश श्रीवास्तव के नेतृत्व में छात्रों की टीम ने कार्यक्रम में अपनी प्रतिभागिता की।

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