महाराष्ट्र और गुजरात में तूफान ताउते ने जमकर कहर बरपाया है। गुजरात में सोमवार रात को पहुंचने के बाद तूफान ने दक्षिण में 2500 गांवों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। कई इलाकों में बिजली भी चली गई, जबकि बड़ी संख्या में पेड़ टूट गए। इस चक्रवाती तूफान में दोनों राज्यों की फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। महाराष्ट्र में तूफान की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि चार तटीय जिलों में 9 हजार हेक्टेयर जमीन पर लग रही आम की फसल को नुकसान हुआ। वहीं, कई जिलों में कुल हजारों की संख्या में पेड़ टूटकर गिरने की भी घटनाएं सामने आई हैं। राज्य में एक लाख से ज्यादा लोगों को दूसरी सुरक्षित जगह पहुंचाया गया।
165 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले चक्रवाती तूफान का लैंडफॉल गुजरात के पोरबंदर के पास हुआ, जिसकी वजह से पूरे गुजरात और राजस्थान के दक्षिण इलाकों में मंगलवार को जमकर बारिश हुई। चक्रवात का असर उत्तर भारत के कई शहरों में भी देखा गया। मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया। गुजरात के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती आंकड़ों के अनुसार तूफान की वजह से कम से कम 16500 घरों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही 40 हजार पेड़ गिर गए और 196 सड़कों पर भी असर हुआ। गुजरात सरकार ने भी करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
भारतीय तटरक्षक बल ने मंगलवार को कहा कि उसने मछली पकड़ने वाली एक नाव पर सवार आठ मछुआरों को बचाया, जो चक्रवात ताउते के कारण गुजरात में वेरावल बंदरगाह के तट से समुद्र में चली गई थी। इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश दमन में सीजी हवाई अड्डे से संचालित दो तटरक्षक चेतक हेलीकॉप्टरों ने खराब मौसम के बीच सतपाती तट (पड़ोसी महाराष्ट्र में) से समुद्र से फंसे जहाज ‘गल कंस्ट्रक्टर’ के चालक दल के आठ सदस्यों को बचाया। राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, तीन नावें, जो वेरावल बंदरगाह पर बंधी थीं, मंगलवार की तड़के समुद्र में बह गईं। तेज हवाओं के कारण रस्सियां टूटने के बाद तीनों नावें समुद्र में बह गई थीं। सब डिविजनल मजिस्ट्रेट एस एन जानकट ने बताया कि एक नाव पर आठ मछुआरे थे, जबकि अन्य दो नावों पर कोई नहीं था।

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