जनसत्ता के पत्रकार अंशुमान शुक्ल का यह लेख हमने जनसत्ता के न्यूज पोर्टल से साभार लिया है।
भारतीय राजनीति में लुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके नैतिकता, सिद्धांत, राजनीतिक मर्यादा जैसे न जाने कितने भारी भरकम शब्दों को संजो कर चल रही आम आदमी पार्टी (आप), शब्दों को यथार्थ में बदलने की वजह से अलग-थलग पड़ती नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी, राजनाथ सिंह और नरेंद्र मोदी सरीखे अनुभवी नेताओं के दांत खट्टे कर रहे आप उम्मीदवार पर्याप्त धन के अभाव के बाद भी तपती धूप में नंगे पांव मैदान में डंटे हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती। इन पचास उम्मीदवारों में से अधिकांश के रण क्षेत्र में आप के स्टार प्रचारक अरविंद केजरीवाल का पहुंचना असंभव हो गया है। क्योंकि पार्टी के पास इतना धन नहीं कि किराए पर हेलिकाप्टर लेकर अरविंद केजरीवाल की जगह-जहग सभाएं कराई जा सकें।
आप के पास भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी से मुकाबिल होने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। यही वजह है कि उसके स्टार प्रचारक arvin-09_120813055144 को चंद मिनटों का फासला सड़क और रेल मार्ग से घंटों में पूरा करना पड़ रहा है। दो दिन पूर्व अरविंद केजरीवाल वाराणसी से सड़क मार्ग से कुमार विश्वास के समर्थन में रोड शो करने अमेठी पहुंचे। कुमार विश्वास कहते हैं, रोड शो के दौरान बड़ी समस्या वाहनों की थी क्योंकि उन्हीं से चुनाव प्रचार भी करना होता है। पहले स्कार्पियों का चयन किया गया क्योंकि उसे गांव-गांव ले जाया जा सकता है। लेकिन उसका रोज का किराया आठ सौ रुपए था। इस लिए छह सौ रुपए रोज पर बुलेरो किराए पर ली गई ताकि रोज दो सौ रुपए बचाए जा सकें। पूरे उत्तर प्रदेश में अधिक से अधिक चुनावी सभाओं के लिए हेलिकाप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है और हम लोगों को वाहनों में डीजल डलवाने के लाले पड़े हैं। आप के पचास से अधिक उम्मीदवार ऐसे हैं जिनके पास पर्याप्त धन नहीं है।
अब तक जेबें भर कर देश बदलने निकले राजनेताओं से इतर सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में अपने साथियों के साथ खाली जेब कूद पड़े अरविंद केजरीवाल के पास अपने उम्मीदवारों को देने के लिए कुछ नहीं है। सिवाय भ्रष्टाचार से लड़ने का जज्बा देने के। उत्तर प्रदेश के आसमान में सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में हेलिकॉप्टर पतंगों की तरह उड़ रहे हैं। नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, मायावती और न जाने कितने नेताओं को एक सभा से दूसरी सभा तक ले जाने के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तीन सौ से अधिक उड़ानें या तो उत्तर प्रदेश में उतरी हैं या इसके आसमान को चीरती हुई गुजरी हैं। लेकिन आप के किसी भी नेता का ऐसा भाग्य कहां कि वह ऐसी किसी एक उड़ान में बैठ कर सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में उत्तर प्रदेश की अधिसंख्य सीटों तक खुद की दखल पेश कर सके। धन बचाने की जद्दोजहद के बीच चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे आप के उम्मीदवारों ने बड़े-बड़े सियासी सूरमाओं की पेशानी पर बल पैदा कर दिया है। मसलन 14 साल में पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अमेठी में राहुल गांधी के लिए चुनावी सभा करनी पड़ी। यह सिर्फ संयोग मात्र नहीं था। किसी दूसरे दल के उम्मीदवार ने उन्हें ऐसा करने पर विवश किया होगा, शायद।
अपने जमीर को पूंजी बनाकर पहला लोकसभा का चुनाव लड़ रही आप के सामने परेशानियां कम नहीं हैं। लेकिन इतनी बड़ी भी नहीं कि उनसे निपटा न जा सके। सड़क और ट्रेन से चुनाव प्रचार कर रहे पार्टी के नेता अपनी इच्छाशक्ति और सिद्धांतों से नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मुलायम सिंह यादव, मायावती सरीखी नेताओं के सामने दिक्कतें पेश कर रहे हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि जनता आम आप को कितना पसंद करती है। क्योंकि यही पसंद इस बात का संकेत होगा कि दरअसल उत्तर प्रदेश के लोगों की पसंद क्या है? सियासी गाना-बजाना, या लोगों से सीधे जुड़कर उनके हितों की बात।

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