पेट के रोगों में आंतों को डिटॅाक्स करने के तरीके —

आंतों में विजातीय तत्व और भोजन के अपशिष्ट पदार्थ जमा होते रहते हैं।त्रिफला चूर्ण इन्हें स्वाभाविक ढंग से शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है। यह आंतों को स्वच्छ कर डिटॅाक्स करता है। विषैले तत्व बाहर निकलने पर शरीर का फालतू वजन भी कम होने लगता है। त्रिफला अम्ल पित्त यानी ऍसीडीटी को भी नियंत्रित करता है। त्रिफला लिवर को भी डिटॅाक्स करता है। रात को सोते समय गुन गुने पानी से एक चम्मच चूर्ण लेना उचित है।
गेहूं का चोकर जिसे अक्सर लोग फ़ेंक देते हैं यह छिलका फाइबर और विटामिनयुक्त होता है। यह चोकर शरीर में जमा वसा को सोख लेता है जिससे अनावश्यक चर्बी समाप्त होकर शरीर का वजन नियंत्रण में रहता है। गेहूं का चोकर गर्म दूध में मिलाकर लेने से शरीर का वजन कम होता है।

अपच रोग में पपीता और पाइनएप्पल फल बहुत उपकारी हैं। पपीते में ग्लाइसेमिक इंडेक्स की मात्रा बहुत कम होने से यह डायबिटीज ,आर्थराइटिस और मोटापा में हितकारी सिद्ध होता है। इसका पेपैन अेंजाइम भोजन पचाने में सहायक है।रात के भोजन से कुछ पहिले पपीते और पाइनएप्पल के कुछ टुकडे लेने से पाचन संस्थान ठीक रहता है।

सुबह उठते ही आधा लिटर गुन गुना पानी नियमित पीना शरीर के स्वास्थ्य के लिये हितकर रहता है।भूख शांत करने के लिये स्नेक्स या फ्राइड फूड खाने से वजन बढता है और एसिडिटी जैसी समस्यायें पैदा हो जाती हैं।

भोजन के साथ फलों का सलाद लेना फायदेमंद होता है।trifala

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