लखनऊ: थाईलैंड से सात लाख रुपये में कॉल गर्ल को बुलाने वाला राष्ट्रीय पार्टी के बड़े नेता और बिल्डर के अय्याश रईसजादे की करतूत से पूरा परिवार अब परेशानी में पड़ चुका है. सूत्रों की मानें तो थाई कॉलगर्ल के संपर्क में आये माननीय के बेटे के साथ पूरा परिवार कोरोना पॉजिटिव हो गया है. थाईलैंड की कॉल गर्ल का मामला उछलने के बाद फिलहाल पूरा परिवार गुपचुप तरीके से होम आइसोलेशन में है. यही नहीं माननीय के बेटे के कई दोस्त भी पॉजीटिव निकले हैं. वह भी होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं. हालांकि इस पूरे मामले में पुलिस और शासन व जिला प्रशासन मौन धारण किए हुए हैं.
परिवार तक पहुंचा संक्रमण

सूत्रों का दावा है कॉलगर्ल के साथ माननीय का बेटा और उसके कुछ दोस्त कई दिन साथ रहे. कॉल गर्ल के कोरोना संक्रमित होने के बाद इन लोगों ने उसे डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में भर्ती कराया. नतीजन, माननीय का बेटा व उसके दोस्त कोरोना पॉजीटिव हो गए. इन लोगों के जरिए संक्रमण उनके परिवार तक पहुंचा. बताया जा रहा है कि माननीय और बड़े बिल्डर के बेटे व उनके दोस्तों के साथ ही पूरा परिवार कोरोना पॉजिटिव हो गया है.

गले नहीं उतर रही पुलिस की थ्योरी

थाईलैंड की कॉल गर्ल की मौत के मामले में पुलिस की थ्योरी गले नहीं उतर रही है. पुलिस की माने तो एलआइयू से मिले पासपोर्ट की छानबीन में पता चला कि टूरिस्ट वीजा के जरिए थाईलैंड से युवती लखनऊ आई थी और हजरतगंज स्थित एक होटल में ठहरी थी. वहां उसकी तबीयत खराब हुई और उसे डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल गोमती नगर में भर्ती कराया गया, जहां 3 मई को उसकी मौत हो गई. थाईलैंड दूतावास से अनुमति मिलने के बाद पांच मई को उसका बैकुंठ धाम में अंतिम संस्कार करा दिया गया. अंतिम संस्कार का सजीव वीडियो प्रसारण थाईलैंड में उसके परिवार ने भी देखा. दूतावास के कहने पर ही उसकी अस्थियां उसके गाइड सुलतानपुर निवासी सलमान को दे दी गई.

अब सवाल यह उठता है कि कोरोना कॉल में युवती किसके बुलाने और किस काम से लखनऊ आई थी. अगर माननीय के बेटे ने उसे 7 लाख रुपये खर्च कर लखनऊ बुलाया था तो पुलिस ने माननीय के बेटे से पूछताछ क्यों नहीं की. लिखा पढ़ी में माननीय के बेटे का नाम सिरे से क्यों उड़ा दिया. छोटी-छोटी बातें मीडिया में शेयर करने वाली पुलिस ने 3 दिन तक पूरे मामले को क्यों दबा रखा था? इन सारे सवालों का जवाब लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट को देना ही पड़ेगा. फिलहाल इस मामले में पुलिस कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

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