रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया चार साल में पहली बार सरकारी बॉन्ड बेचने reserve bank कर सकता है। इसका मकसद अमेरिकी डॉलर के जबरदस्त फ्लो को रोकना है। आम चुनाव के बाद स्थिर सरकार बनने की आस में देश में जबरदस्त मात्रा में डॉलर आ रहा है। नई सरकार बनने के बाद इसमें और तेजी आ सकती है। मार्केट स्टेब्लाइजेशन स्कीम यानी एमएसए के तहत आरबीआई ने सोमवार को 2014-15 में सरकारी सिक्यॉरिटीज की बिक्री के लिए 50,000 करोड़ रुपये की सीमा तय की है। इस स्कीम को 2004 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद सिस्टम में जरूरत से ज्यादा कैश को हटाना था।
बार्कलेज बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिंद्य दास गुप्ता ने बताया, ‘फिलहाल, मार्केट स्टेब्लाइजेशन बॉन्ड जारी करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हालात ऐसे नहीं हैं। ओएमओ (ओपन मार्केट फॉर लिक्विडिटी इन्फ्यूजन) और एमएसएस बॉन्ड एक साथ नहीं चल सकता। हालांकि, 2014-15 के लिए अगर जरूरत पड़ी तो एफआईआई के निवेश के आधार पर आरबीआई इस पर फैसला कर सकता है।’
डीलर्स के मुताबिक, 16 मई को चुनावों के ऐलान के बाद नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनने की उम्मीद है, लिहाजा विदेशी फंडों के प्रवाह को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, इन्वेस्टर्स के एक तबके के मुताबिक, सिस्टम में कैश और कम होता है, तो आरबीआई मार्केट में 50,000-60,000 करोड़ रुपये डालने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस की इजाजत दे सकता है।

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