नई दिल्ली: नई दिल्ली: देश में ऑक्सीजन के वितरण को बेहतर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया है. कोर्ट ने कहा है कि 12 सदस्यीय टास्क फोर्स आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और कोविड से निपटने की भविष्य की तैयारियों पर भी सुझाव देगा. इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र से मिल रहे ऑक्सीजन पर राज्यों की जवाबदेही तय करने की भी जरूरत बताई है. कोर्ट ने कहा है कि राज्यों की मांग और वहां की वितरण व्यवस्था के आकलन के लिए हर राज्य का ऑक्सीजन ऑडिट करवाया जाएगा.
भविष्य की तैयारियों पर ज़ोर
6 मई को मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एम आर शाह की बेंच ने माना था कि इस समय हर राज्य की ऑक्सीजन की जरूरत का आकलन जिस तरीके से किया जा रहा है, वह वैज्ञानिक नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा था कि ऑक्सीजन को राज्यों तक पहुंचाने से लेकर राज्य के भीतर ऑक्सीजन के वितरण की प्रणाली में खामियां हैं. इसी वजह से जरूरतमंदों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रहा है. साथ ही साथ कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया था कि कोरोना से भविष्य में बेहतर तरीके से निपटने के लिए अभी से तैयारी करने की जरूरत है.
चुनिंदा विशेषज्ञों की टीम
सुप्रीम कोर्ट ने आज जारी आदेश में 12 सदस्यों वाले नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया है. इस टास्क फोर्स के संयोजक कैबिनेट सचिव या उनकी तरफ से मनोनीत अधिकारी होंगे. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव भी इसके सदस्य होंगे. देश के 10 जाने-माने डॉक्टरों को टास्क फोर्स में शामिल किया गया है.
यह डॉक्टर हैं :-
(1) डॉ. भबतोष बिस्वास, पूर्व कुलपति, प. बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज
(2) डॉ. देवेंदर सिंह राणा, अध्यक्ष, सर गंगाराम हस्पताल, दिल्ली
(3) डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी, अध्यक्ष, नारायणा हेल्थकेयर, बंगलुरु
(4) डॉ. गगनदीप कंग, प्रोफेसर, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु
(5) डॉ. जे वी पीटर, निदेशक, क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु
(6) डॉ. नरेश त्रेहन, सीएमडी,मेदांता हस्पताल, गुरुग्राम
(7) डॉ. राहुल पंडित, ICU निदेशक, फोर्टिस हस्पताल, मुलुंड, मुंबई
(8) डॉ. सौमित्र रावत, प्रमुख, सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी, गंगाराम हस्पताल, दिल्ली
(9) डॉ. शिव कुमार सरीन, वरिष्ठ प्रोफेसर, इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंस, दिल्ली
(10) डॉ. ज़रीर एफ उडावाडिया, श्वास रोग विशेषज्ञ, हिंदुजा और ब्रीच कैंडी हस्पताल, मुंबई
सुप्रीम कोर्ट ने इस टास्क फोर्स के गठन की वजह बताते हुए लिखा है, “देश इस समय अभूतपूर्व मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है. अग्रणी विशेषज्ञों का यह टास्क फोर्स देश की तैयारियों को बेहतर बनाने ने मददगार साबित होगा.” कोर्ट ने कहा है कि टास्क फोर्स नीति आयोग, डीजी हेल्थ सर्विस, एम्स निदेशक, उद्योग सचिव, सड़क परिवहन सचिव जैसे अधिकारियों से सहयोग ले सकता है. कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह 2 नोडल अधिकारी नियुक्त करे,जो टास्क फोर्स के लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाने के लिए जिम्मेवार हों.
6 महीने का कार्यकाल
कोर्ट ने टास्क फोर्स का कार्यकाल फिलहाल 6 महीने का रखा है. टास्क फोर्स से कहा गया है कि समय-समय और कोर्ट को रिपोर्ट दे. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि ऑक्सीजन वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने को लेकर 1 हफ्ते में सुझाव दिया जाए. आदेश में साफ किया गया है कि जब तक टास्क फोर्स अलग-अलग राज्यों के लिए ऑक्सीजन के आवंटन की व्यवस्था तय नहीं करता, तब तक केंद्र सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की तरफ से बताई गई मात्रा में ही किसी राज्य को ऑक्सीजन देता रहेगा. मामले को 17 मई  को सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया गया है.
राज्यों का होगा ऑक्सीजन ऑडिट
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि केंद्र से मिलने वाले ऑक्सीजन के सही वितरण पर राज्य को जवाबदेह बनाना भी ज़रूरी है. हर राज्य की सही ज़रूरत और आंतरिक वितरण प्रणाली पर रिपोर्ट देने के लिए टास्क फोर्स ऑक्सीजन ऑडिट टीम बनाए. दिल्ली की ऑक्सीजन ऑडिट टीम सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से ही बना दी है. इसमें एम्स निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया, मैक्स हेल्थकेयर के डॉक्टर संदीप बुद्धिराजा के अलावा केंद्र और दिल्ली सरकार से जॉइंट सेक्रेट्री स्तर के 1-1 आईएएस अधिकारी होंगे.

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