प्रयागराजः जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत प्रज्ञानंद गिरी गुरुवार की सुबह ब्रह्मलीन हो गए. उन्होंने स्वरूपरानी चिकित्सालय प्रयागराज में अंतिम सांस ली. महंत प्रज्ञानंद जूना अखाड़ा के वृंदावन आश्रम के प्रभारी थे. उन्हें शुक्रवार को उसी आश्रम में समाधि दी जाएगी. परिजन पार्थिव शरीर को लेकर वृंदावन जाएंगे. समाधि प्रक्रिया में महंत हरि गिरी सहित जूना अखाड़ा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे.
74 वर्ष की आयु में दुनिया को कहा अलविदा
महंत प्रज्ञानंद गिरी ने 74 वर्ष की आयु में दुनिया को अलविदा कह दिया. वे पिछले दिनों हरिद्वार में आयोजित कुंभ में शामिल हुए थे. उसके बाद ही वे कोरोना की चपेट में आ गए. दो हफ्ते पहले सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई तो उन्हें प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
बलिया के रहने वाले थे प्रज्ञानंद गिरी
बलिया जनपद के सेंदुरिया गांव में जन्म लेने वाले प्रज्ञानंद गिरी का संन्यास से पहले का नाम प्रभुनाथ ओझा था. वे उत्तर प्रदेश पुलिस में दारोगा के पद पर रहे. बाद में पीपीएस अफसर बनकर वर्ष 2008 में रिटायर हुए थे. रिटायरमेंट के बाद वे जूना अखाड़े के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरी के संपर्क में आए. इससे उनका धार्मिक गतिविधियों की तरफ झुकाव हुआ. उन्होंने हरि गिरी से सन्यास की दीक्षा ली, जबकि 2019 में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी ने हरिहर आश्रम में उन्हें विधिवत दीक्षित करते हुए महामंत्री पद पर आसीन किया. इसके बाद वे श्रीमहंत प्रज्ञानन्द गिरी बन गए.
पुलिस अफसर ऐसे बना महंत
वर्ष 1970 में वे पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे और साल 2008 में सीओ प्रयागराज के पद से सेवानिवृत्त हुए. दस साल तक वे प्रयागराज में बतौर सीओ के पद पर तैनात रहे. चार बार सीओ अखाड़ा भी रहे. इस दौरान इनकी नजदीकियां अखाड़ों के संतों के साथ बनती चली गई. साल 2010 में उन्हें हरिद्वार कुंभ में भी सीओ अखाड़ा बनाया गया था. इससे धार्मिक गतिविधियों के प्रति उनका झुकाव बढ़ता गया.

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