नई दिल्ली: बिल्डर-मकान खरीदार मामलों के लिए पश्चिम बंगाल में RERA की जगह लागू किए गए स्थानीय कानून को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समवर्ती सूची के मामलों में संसद से बने कानून को प्राथमिकता दी जाती है. पश्चिम बंगाल में एक समानांतर कानून लाने की कोई जरूरत नहीं थी. कोर्ट ने यह भी माना है कि राज्य का कानून WBHIRA, केंद्रीय कानून RERA की कॉपी कर बनाया गया है.
2016 में संसद ने रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट (RERA) पारित किया था. सभी राज्यों को इसे लागू करना था. लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार ने इसकी बजाय वेस्ट बंगाल हाउसिंग इंडस्ट्री रेग्युलेशन एक्ट (WBHIRA) 2017 बना दिया. इस तरह के कानून को संविधान के अनुच्छेद 254(2) के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी के लिया भेजा जाना चाहिए था. राज्य सरकार ने यह भी नहीं किया और जून 2018 में अपना कानून लागू कर दिया. इसके खिलाफ पश्चिम बंगाल के मकान खरीदारों का संगठन फॉर्म फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.
याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता संगठन ने दलील दी कि संसद के कानून की पूरी तरह नकल कर बनाया गया कानून के सिर्फ कुछ बिंदु अलग रखे गए है. यह बिंदु मकान खरीदारों के हितों के खिलाफ हैं. जैसे WBHIRA में ओपन पार्किंग स्पेस बेचने की अनुमति दी गई है. कई बातें जिन्हें RERA के तहत कोर्ट में मुकदमा चलाया जा सकता है, उनमें बिल्डर और खरीदार में समझौते की व्यवस्था बना दी गई है. जवाब में राज्य सरकार ने दलील दी कि संपत्ति की खरीद-बिक्री का विषय समवर्ती सूची का है. इसलिए, राज्य को उस पर कानून बनाने का अधिकार है.
मामले पर लंबी सुनवाई के बाद जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने पिछले महीने फैसला सुरक्षित रखा था. आज दिए विस्तृत आदेश में जजों ने माना है कि संसद से बने कानून के रहते राज्य का कानून बनाना सही नहीं था. इसलिए WBHIRA को खारिज किया जा रहा है. इसका मतलब यह नहीं कि राज्य में इसी विषय पर 1993 में बना कानून वापस अमल में आ जाएगा. अब पश्चिम बंगाल में RERA लागू होगा. कोर्ट ने यह भी कहा है कि WBHIRA कानून के तहत राज्य में पिछले 3 साल में लिए गए फैसले बने रहेंगे, ताकि लोगों में कोई भ्रम न हो.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.