उन्नाव : किशोरी से दुष्कर्म के मामले में तिहाड़ जेल में सजा काट रहे कुलदीप सिंह सेंगर के परिवार का माखी गांव में प्रधान पद पर हमेशा से कब्जा रहा है. आजादी के बाद माखी ग्रामसभा से सेंगर के नाना बाबू वीरेंद्र सिंह करीब 36 साल प्रधान रहे. इसके बाद 1987-88 में कुलदीप सेंगर प्रधान बने और तभी से इनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई.
इसके बाद 2000 से 2010 तक कुलदीप की मां चुन्नी देवी प्रधान रहीं. पिछले चुनाव में कुलदीप के छोटे भाई अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह प्रधान बनीं. इस बीच आरक्षण के चलते जब सेंगर परिवार का सदस्य चुनाव नहीं लड़ पाया तो किसी खास को मैदान में उतारकर जीत दर्ज कराई. हालांकि इस बार के चुनाव में कुलदीप के परिवार का कोई भी सदस्य मैदान में नहीं उतरा. इस बार प्रधान पद पर उनके विरोधी शिशुपाल सिंह का कब्जा हो गया है.
बता दें कि उन्नाव के ब्लॉक मियागंज की माखी ग्राम पंचायत में प्रधान पद पर आजादी के बाद से अधिकांश समय पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के परिवार का ही कब्जा रहा. 1952-1983 तक इनके नाना बाबू वीरेंद्र सिंह प्रधान रहे. इसके बाद एक बार 1983-1988 रवींद्र नाथ शुक्ला उर्फ लल्लन शुक्ला प्रधान बने. इसके बाद 1989 में कुलदीप सेंगर निर्विरोध प्रधान चुने गए.
वहीं एक बार 1995 में शिशुपाल सिंह की पत्नी रामेश्वरी देवी प्रधान बनीं. साल 2000 में एक बार फिर प्रधान पद कुलदीप के कब्जे में आया और उसकी मां चुन्नी देवी प्रधान बनीं जो 2010 तक प्रधान रहीं. वहीं साल 2010 में माखी की ये हॉट सीट अनुसूचित जाति के खाते में गई तो कुलदीप के खास जयचंद विमल प्रधान बने. 2015 में कुलदीप सेंगर के छोटे भाई की पत्नी अर्चना सिंह प्रधान बनीं. इस बार गांव में प्रधान की सीट सामान्य थी लेकिन कुलदीप सिंह सेंगर के परिवार से किसी ने चुनाव मैदान में ताल नहीं ठोकी.

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