लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण के लिए मंगलवार यानी आज से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. प्रदेश के 20 जिलों के प्रत्याशी तीसरे चरण चुनाव के लिए 13 और 15 अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे. राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी संबंधित जिलाधिकारियों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं.

इस तरह होगी तीसरे चरण की प्रक्रिया
तीसरे चरण के चुनाव के लिए 13 और 15 अप्रैल को नामांकन पत्र दाखिल किए जाएंगे. 16 से 17 अप्रैल के बीच नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी. 18 अप्रैल को नामांकन पत्र वापसी की तारीख निर्धारित की गई है. प्रतीक चिह्न यानी चुनाव चिह्न का आवंटन 18 अप्रैल को ही किया जाएगा. तीसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को होगा.

इन जिलों में होगा 26 अप्रैल को मतदान
प्रदेश के 20 जिलों में तीसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को होगा. तीसरे चरण में शामली, मेरठ, मुरादाबाद, पीलीभीत, कासगंज, फिरोजाबाद, औरैया, कानपुर देहात, जालौन, हमीरपुर, फतेहपुर, उन्नाव, अमेठी, बाराबंकी, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, देवरिया, चंदौली, मिर्जापुर और बलिया जिले शामिल हैं.

इतने पदों के लिए होगा तीसरे चरण का मतदान
तीसरे चरण के पंचायत चुनाव का मतदान 20 जिलों के 746 जिला पंचायत सदस्य वार्डों में होगा. इसी प्रकार क्षेत्र पंचायत सदस्य वार्ड के 16,801 पदों के लिए मतदान होगा. वहीं 14,379 ग्राम पंचायत और 1,80,473 ग्राम पंचायत वार्ड सदस्य के पदों के लिए भी मतदान होगा.
कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कराने की सख्त हिदायत
कोविड-19 के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने सभी जिलाधिकारियों को पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के दौरान कोविड-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने के निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने कहा है कि नामांकन के समय उम्मीदवार और उनके प्रस्तावक ही नामांकन स्थल तक पहुंचेंगे. किसी भी प्रकार के जुलूस आदि पर प्रतिबंध रहेगा. यदि कहीं पर जुलूस निकलता है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी की होगी.
निर्वाचन आयोग ने जारी किए हैं निर्देश
राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से पंचायत चुनाव में शांति व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील बूथों पर अधिक निगरानी के साथ मतदान कराने के निर्देश सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को दिए जा रहे हैं. आयोग की तरफ से हिदायत दी गई है कि अगर किसी जिले में चुनाव के दौरान अप्रिय घटना होगी तो संबंधित जिले के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.

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