shadiप्यार के आगे तो भगवान को भी झाुकना पड़ता है। तब पंचायत के फैसले क्या है? जी हां आपने वह कहावत तो सुनी होगी मिंया बीबी राजी तो क्या करेगा काजी। आज वह सच साबित हो गयाी। आखिरकार प्यार के आगे खाप पंचायत झुक गई. अब हरियाणा के 42 गांवों के लोग गांव, पड़ोसी गांव और गोत्र छोडक़र कहीं भी शादी कर सकेंगे. सतरोल खाप ने 650 वर्ष पुरानी परपंरा को तोड़ते हुए सर्वसम्मति से यह फैसला लिया.
हिसार के नारनौंद में आयोजित सतरोल खाप की महापंचायत में यह भी फैसला लिया गया कि अब कोई जातीय बंधन भी नहीं रहेगा और खाप का चबूतरा नारनौंद में बनाया जाएगा. हजारों लोगों की मौजूदगी में इस फैसले पर मुहर लगाई गई. हालांकि कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया और बीच में ही महापंचायत से उठकर चले गए.
फैसला लेने से पहले खाप के अनेक मौजिज लोगों ने अपनी राय रखी. सबसे पहले खाप के प्रधान इंद्र सिंह ने कहा कि हम सतरोल खाप को तोड़ नहीं रहे हैं बल्कि रिश्ते नातों के बंधन को खोल रहे हैं. इसके बाद ऋषि राजपुरा ने कहा कि पंचायत से लोकसभा बनी थी, लोकसभा से पंचायत नहीं बनी. हमारे बुजुर्ग जैसा भाईचारा हमें देकर गए थे, हमें उनकी विरासत को बचाते हुए इस संभालकर रखना चाहिए. खाप में आने वाले गांवों की आपस में रिश्तेदारी ठीक नहीं रहेगी.
खली कमी लड़कियों की
नारनौंद के मुकेश लोहान ने कहा कि समय के अनुसार खाप ने अपने नियमों में पहले भी बदलाव किए हैं और अब भी समय की मांग को देखते हुए ऐसा होना चाहिए. कैप्टन महाबीर ने कहा कि रिश्ते नाते बनने से खाप टूटेगी नहीं बल्कि और मजबूत होगी. मास्टर वजीर सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सतरोल खाप में आज तक आपस में रिश्तेदारी नहीं होती थी, अगर हम इसे खोलकर रिश्तेदारी करेंगे तो तब भी हमारे बच्चों के रिश्ते शायद न हो पाएं. क्योंकि आज लड़कियां लडक़ों के मुकाबले काफी कम हैं. हमें अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देकर इन समस्याओं को सुलझाना होगा.

पेटवाड़ तपा के लोगों ने जताया विरोध
सभी लोगों की रायशुमारी करके पांच लोगों की एक कमेटी बनाई गई. इस कमेटी में उगालन तपा से जिले सिंह, नारनौंद तपा से होशियार सिंह, बास तपा से हंसराज और कैप्टन महाबीर सिंह व सतरोल खाप के प्रधान सूबेदार केंद्र सिंह को शामिल कर निर्णय किया गया कि आज से सतरोल खाप के लोग आपस में रिश्तेदारी कर सकेंगे. इस फैसले को लेकर उगालन तपा, बास तपा और नारनौंद तपा के प्रधानों सहित मौजिज लोगों ने अपनी समहति दी लेकिन पेटवाड़ तपा के लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया और महापंचायत से उठकर चले गए.

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