jagat sharmaगुटबाजी,सत्तासुख या मोदी लहर का परिणाम है
कुछ बडे नेताओ का दलबदल बता रहे हैं जगत शर्मा
दतिया। कांग्रेस का लोकसभा का टिकिट फेंककर बकायदा दलबदल करके भाजपा के प्रत्यासी बने पूर्व उच्चाधिकारी डॉ भागीरथ प्रसाद से शुरू हुआ दलबदल का सिलसिला अंत तक चलता रहा और अभी भी इसकी संभावना सं इंकार नही किया जा सकता है। जिले में लोकसभा चुनाव के मतदान पूर्व हुइ्र्र भाजपाकी आम सभा में अचानक कांग्रेस और बसपा के कुछ बडे नेताओं ने सर्मपण किया और पार्टी में शामिल हो गये। मतदान से दो दिन पूर्व उनका इस तरह से अपने दल को छोड कर भाजपा मे षामिल हो जाना किसी की समझ में नही आया वही राजनैतिक ताडियों ने ताड कर घोशणा कर दी अभी और भी कुछ नेता भाजपा में शमिल होगें लेकिन क्यों हो रहे है इसके जबाब में वही पुरानी सोषेबाजी नुमा जबाब दिये जा रहे थे कि कांग्रेस में कोई नेता नही है केवल मोदी ही देश को बचा सकते है और इसलिये मोदी के लिये हम भाजपा के साथ है। लेकिन क्या केवल मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिये ही इस तरह से दलबदल हुआ है। ऐसा लगता नही है क्योकि जो लोग भाजपा में शामिल हुऐ है उनमें से कुछ नेताओं की नजर आने वाले नगरीय निकाय के चुनावों पर भी निष्चित रहेगी ही वही संगठन में और सत्ता के साथ रहने का लाभ मिलेगा सो अलग । सूत्रों की माने तो इस दलबदल में बसपा और कांग्रेस की आपसी गुट वाजी भी हावी रही है। जिसके कारण भी दलबदल हुआ है और भाबिष्य में भी कुछ कांग्रेसी जो अभी भी उपेक्षा का शिकार है पाला बदल सकते है।
कांग्रेस के दो दो महामंत्रियों के टूटने का कारण
सूत्रो की माने तो कांग्रेस के दो दो महामंत्री श्रीमति कुसुम त्रिपाठी और बृजेन्द्र सिंह परमार के टूटने का कारण कांग्रेस में तेजी से बढ रहा पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती गुट का प्रभाव है। गोरतलब है कि कांग्रेस से भाजपा में आये ये दोनो ही महामंत्री पूर्व विधायक कु. घनष्याम सिंह गुट के रहे है और घनष्यामसिंह के सेवढा चले जाने के बाद षहर कांग्रेस और दतिया विधानसभा के अंर्तगत आने वाले ग्रामीण क्षेत्र में अब राजेन्द्र भारती गुट का प्रभाव ही सबसे अधिक है जिसके कारण ही कु. गुट के नेता और पदाधिकारी अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे है। पिछले किला चौक पर हुई सिधिया की चुनावी सभा में यह देखा भी गया था कि किस तरह से मंच पर भारती गुट हावी था और श्रीमति कुसुम त्रिपाठी सहित अन्य कई कु. समर्थक नेता खुद को बेगानों की रतह देख रहे थे उसी सभा में बृजेन्द्र परमार भी मंच पर न होकर मंच के पंडाल से तक दूर थे। कहा जा सकता है कि मोदी की लहर के बहाने उपेक्षा के शिकार होकर ही कांग्रेसी नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है और अभी कुछ औरों के भी आने की संभावना बनी हुई। यहां यह भी गौर तलब है कि श्रीमती कुसुम त्रिपाठी पहले भी भाजपा में रह चुकी है वही बृजेन्द्र सिंह परमार के परिवार का संवध जनसंघ और आरएसएस से रहा है।
बसपा की गुटवाजी और सत्तासुख बना दलबदल का कारण
बसपा में गुटवाजी कभी सडको पर नही दिखती लेकिन इसके बाद भी जिले में बसपा दो गुटों में बंटी हुई पार्टी है जिसमें उक तरफ कालीचरण राघेलाल का गुट रहा है दूसरी ओर रामसेवक पाल का गुट भी सक्रिय रहा पिछले दिनों संपन्न हुऐ विधानसभा चुनाव में यह देखा भी गया कि जब कालीचरण कुषवाह का टिकिट इदरगढ में पार्टी के राश्टीय उपाध्यक्ष राजाराम ही सभा के बाद फायनल हो गया तो इस बात को रामसेवक पाल ने अपनी तौहीन समझी और वह पार्टी के जिला प्रभारी वन कर लौटे कुल मिलाकर कहा जाये तो आज भाजपा के विकास कार्य और डॉ नरोत्तम मिश्रा से प्रभावित होने की वात करने वाले कालीचरण कुषवाह चुनाव से पहले उनके विकास पर प्रश्नचिन्ह ही नही लगा रहे थे वल्कि उन्होने उनके खिलाफ चुनाव भी लडा। लेकिन अब हारने के बाद वह उसी विकास को प्रमाणित कर रहे है साथ ही नरोत्तम मिश्रा से प्रभावित होने के साथ ही तमाम तरह की सफाईयां मंच से दे रहे है। इनके अलावा सेवढा विधायक भी का भी बसपा से मोह भंग का कारण अचानक मोदी के सर्वषक्तिमान होने के आभास के कारण हुआ उनहोने कहा है कि वह विना शर्त भाजपा में आये है। लेकिन सत्तारूण दल में कोई षर्त के साथ भी आता है। नेताजी अपने भोलेपन में इतना भी नही जानते ।
पहले भी कई दिग्गज कर चुके है दलबदल
इस चुनाव में होने वाले दलबदल से पहले भी कई दिग्गज नेता दलबदल कर चुके है जिनमें पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती ने दो भाजपा बसपा सपा सहित कई दलों को अपनाया और छोडा इनके अलावा कभी स्व.माधवराव सिंधिया के अनन्य सहयोगी और सिंधिया गुट के जिले में सर्वेसर्वा रहे पूर्व विधायक कुं घनश्याम सिंह भी सिंधिया की म.प्र. विकास कांग्रेस में चले गये थे। इनके अलावा भाजपा के बडे नेता माने जाने वाले और आपातकाल में बडी यातनाये झेलने वाले हरिहर श्रीावस्तव भी दलबदलकर का्रगेस में रहे उनके साथ उस समय एक और पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष गुरूदेव शरण गुप्ता भी कांग्रेस में रहे वही वर्तमान में भाजपा के लोकसभा प्रभारी अवधेश नायक भी 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा छोडकर तत्कालीन समय में उमा भारती के दल भाजस में शामिल हुऐ और चुनाव लडां।
विना किसी लोभ के आये है भाजपा में-बृजेन्द्र सिंह परमार
कांग्रेस महामंत्री पद छोडकर भाजपा में आये बृजेन्द्र सिंह परमार का कहना है कि उनका परिवार वहुत पहले से जनसंघ से जुडा रहा है। जिस कारण से हमारी सोच राश्टवादी रही है उनहोने बताया कि वह बिना किसी लोभ या लालच के भाजपा में षामिल हुऐ है। उनका कहना है कि वह मोदी को पीएम बनाने में अपना सहयोग देना चाहते है।
कांग्रेस में हमारी उपेक्षा हो रही थी-कुसुम त्रिपाठी
कांग्रेस का महिला चेहरा रही पार्टी की अब पूर्व महामंत्री श्रीमति कुसुम त्रिपाठी का कहना है कि कांग्रेस में उनकी उपेक्षा की जा रही थी कुछ महीनों पहले ही बीते विधानसभा चुनाव में भी उन्हे कोई जिम्मेदारी नही दी गइ्र्र इस लिये उनहोने कांग्रेस को छोडकर विना किसी षर्त के भाजपा ज्वाइन की उन्होने बताया कि कांग्रेस में राहुल या प्रियंका में से कोई भी पीएप् लायक नही है। इसलिये वह मोदी को पीएम बनाने में अपना सहयोग करना चाहती है।
नरोत्तम के विकास कार्य से प्रभावित हूॅ-कालीचरण कुषवाह
बसपा से भाजपा में आये बसपा के विधानसभा प्रत्यासी रहे कालीचरण कुषवाह का कहना है कि वह नरोत्तम मिश्रा के विकास कार्यो और भाजपा कि विचाारधारा से प्रभावित होकर ही पार्टी में आये है।अब पार्टी उन्हे जहां उपयोगी समझे वही वह काम करने को तैयार है।
मोदी को पीएम बनाना है लक्ष्य-राधेलाल वघेल
सेवढा के पूर्व बसपा विधायक और अब भाजपा नेता राधेलाल वघेल का कहना है कि प्रदेष की भाजपा सरकार द्धारा पिछडै वर्ग के हित में किये गये कार्यो से प्रभावित होकर ही वह भाजपा में शामिल हुऐ है। मोदी को पीएम बनाना ही उनका लक्ष्य है उन्होने कहा कि न तो उन्हे जिला पंचायत का और न ही नगरपालिका का चुनाव लडना है जिसके लिये भाजपा में शामिल होना पढे।
पार्टी में आये नेताओं को सम्मानजनक भूमिका मिलेगी-जगदीश यादव
वही इस पूरे मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष सबको एडजेस्ट करने की बात करते हुऐ कहते कि जो नेता भी भाजपा में शामिल हुऐ हैं वे सभी पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर आये है पार्टी अब उन्हे सम्मानजनक भूमिका प्रदान करेगी । इन नेताओं केे पार्टी में आने पार्टी के अन्य नेताओं या कार्यकर्ताओं कों कहीं कोई नुकसान नही होगा और नहीं उनकी भूमिका कम होगी।सबको समान रूप् से महत्तव दिया जायेगा।

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