हैदराबाद : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पश्चिम बंगाल में दो जनसभाएं कीं. कूचबिहार और डुमरखोला में. उन्होंने इशारों ही इशारों में ऐसी बात कह दी, जिसका राजनीतिक संदेश बहुत गहरा है. उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना भी साधा और अपनी बात इस तरह से रखी कि चुनाव आयोग शायद ही उन्हें नोटिस थमाए.
पीएम मोदी ने कहा कि ममता दीदी को खुलेआम मुस्लिमों के वोट मांगने पड़ रहे हैं. इससे तो ऐसा ही लगता है कि वह चुनाव हार रहीं हैं. उनका मुस्लिम वोट बैंक छिटक गया है. इसके बावजूद चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस नहीं जारी किया है.
मोदी ने कहा कि अगर मैं यह कहता कि सारे हिंदुओं एक हो जाओ और भाजपा के लिए वोट करें, तो न जाने क्या-क्या हो जाता. मीडिया में लंबे-लंबे लेख लिखे जाते. चुनाव आयोग मुझे 10 दिनों के लिए बैन कर देता. पर, दीदी के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ.
ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें लोगों के तिलक लगाने और भगवा वस्त्र पहनने पर भी अब एतराज होने लगा है.
उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति कर ममता बनर्जी ने ‘सेल्फ गोल’ कर लिया है और साथ ही यह स्वीकार कर लिया है कि वह चुनाव हार चुकी हैं.
दरअसल, पीएम मोदी ने अपनी बात भी कह दी और उन्हें शायद ही इसके लिए जिम्मेवार ठहराया जाएगा. वह हिंदुओं को संदेश देना चाहते थे और वह अपने मकसद में कामयाब भी हो गए.
ममता बनर्जी ने तीन अप्रैल को एक चुनावी सभा में मुस्लिम वोटरों से एक होने की अपील की थी. ममता ने रायदिघी की जनसभा में कहा था कि हैदराबाद से जो शख्स आए हैं और फुरफुरा शरीफ के जो लड़के हैं, मुसलमान उन्हें वोट न दें. भाजपा ने दीदी के इस बयान पर चुनाव आयोग में शिकायत भी की है.
प. बंगाल में 27 से 28 फीसदी तक मुस्लिम आबादी है. 100 से ज्यादा सीटों पर मुस्लिमों के वोट जीत और हार को प्रभावित करते हैं.

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