manmohan singh
आखिर इस देश को 1991 में आर्थिक संकट से उबारने वाले मनमोहन सिंह इस तरह क्यों फेल हो गए। उन्हें क्यों कठपुतली और देश का सबसे कमजोर प्रधानमंत्री करार दे दिया गया।् आखिर क्यों ये मशहूर अर्थशास्त्री सत्ता के गलियारे में इस तरह धराशायी हो गया 2004 में जब यूपीए सरकार बनीए तो सोचा था कि सोनिया गांधी पार्टी की बागडोर संभालेंगी और मनमोहन सिंह सरकार की लेकिन ऐसा हो ना सका। प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने अपनी पुस्तक ष्द एक्सीडैंटल प्राइम मिनिस्टर मेकिंग एंड अनमेकिंग ऑफ मनमोहन सिंहष् में कई सनसनीखेज राजनीतिक खुलासे किए हैंए जिसमें उन्होंने सोनिया पर मनमोहन सिंह को कमजोर प्रधानमंत्री बनाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा यह भी खुलासा किया गया है कि सोनिया ने मनमोहन को चतुराई से पीएम ् बनाया था और प्रधानमंत्री ने खुद को सोनिया के सामने सरैंडर किया था। डा बारू ने अपनी पुस्तक में प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े कई रहस्यों को उजागर किया है और निचोड़ के तौर पर यह कहा है कि प्रधानमंत्री ने सत्ता का एकमात्र केंद्र कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को ही माना ताकि पार्टी हाईकमान को इस बात का कतई एहसास न हो कि सत्ता केंद्रों में बंट गई है। किताब में यह भी जिक्र किया गया है कि 2009 में कांग्रेस की जीत के श्रेय को लेकर भी मतभेद थे। प्रधानमंत्री यह चाहते थे कि इसका श्रेय देश को आर्थिक मंदी से बचाए रखने में सरकार की भूमिका को दिया जाए जबकि कांग्रेस हाईकमान इसे पार्टी नेतृत्व की कुशलता के नतीजे के तौर पर पेश करना चाहती थी। किताब के अनुसार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच आर्थिक नीतियों को लेकर भी टकराव की नौबत थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ;पीण्एमण्ओण्द्धने पुस्तक के दावों का खंडन करते हुए यहां एक बयान जारी किया जिसमें कहा गयाए ष्ष्जाहिर तौर पर यह एक विशिष्ट पद के जरिए उच्च आधिकारिक दफ्तर में हासिल की गई पहुंच के व्यावसायिक दुरुपयोग का मामला है।ष्ष् प्रधानमंत्री कार्यालय ने याद दिलाया कि डाण् सिंह ने पिछले साल अक्तूबर में वरिष्ठ संपादकों के साथ बैठक के दौरान सवालों के जवाब में यह कहा था कि डा् बारू के सभी बयानों पर विश्वास नहीं किया जाए।

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