अहमद बुखारी के वोट देने के फतवे पर न्यूज नेटवर्क 24 के लिए मोहित सिंह की विशेष रिपोर्ट
कहते हैं राजनीति एक ऐसा विषय है जिसमें ये कूट कूट कर भरा है कि इसमें कोई अपना नहीं होता। वक्त के साथ- साथ इसका बैरो मीटर बढ़ता घटता रहता है। कब कौन पराया बन जाये इसका भी पता नहीं चल पाता है। राजनीति तो जमाने से होती आयी है उस वक्त भी राजे रजवाणों में राजनीति का खेल खेला जाता रहा । कई राजे रजवाड़े तो राजनीति से हलाहल होकर नेस्त नाबूत तक हो गये। वक्त बदलता गया। राजनीति की धार भी बदलती गयी,तलवारों की जगह बातों और भीतरघात करने के परिभाषा ने स्थान ले लिया। पैसा, रूतबा और कुर्सी के लिये पाला बदलने का खेल शुरू हुआ। इसमें सिर्फ लाभ को सबसे ऊपर रखा गया। ज्यादातर राजनीतिज्ञों ने इसे अपनाया लेकिन देश प्रेम और अपनी कौम की परवाह से लबरेज कुछ लोगों ने अपना एक अलग परिचय देकर अपना अहम तो नहीं राजनीतिज्ञों के सामने उनकी कलई उतारने का प्रयास कर अवाम को ये बताने की कोशिश जरूर की कि कौन उनका हमदर्द है और दुश्मन। इसी सब को लेकर काफी गत दिवस जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी के छोटे भाई याहया बुखारी ने बता दिया कि उनके बड़े भाई ने क्या गजब कर दिया। एक ओर सच्चे देश भक्त की अंतर आत्मा की आवाज ने देश के सच्ची बात बताकर कौम को सही मार्ग दिखा दिया। बताते चले कि इमाम और उनके भाई में पिता के वक्त से सही और गलत पर बहस छिड़ती रही है। 05-syed-yahya-bukhari-600लेकिन अदब और तहजीब को दिल ओ दिमाग में रख कर शाही इमाम अहमद बुखारी के सगे छोटे भाई ने अभी तक अपना मुंह नहीं खोला था। लेकिन कहते है की जब पानी सर से ऊपर हो जाता है तब उसका हश्र भी वैसा ही होता जैसा गत दिवस इमाम के छोटे भाई के बयान ने कर दिखाया। एक तरफ सगा छोटा भाई देश के खातिर इमाम की कारगुजारियों और उनके ऐलानिया बयान से द्रवित होकर उसने इमाम की बढ़ती महत्वकांशा पर विराम लगाने का एक सच्चा प्रयास किया तो वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के मुस्लिमों के सच्चे हमदर्द कहे जाने वाले प्रदेश सरकार के मंत्री मो. आजम खां ने इमाम के बयान का विरोध नहीं बल्कि उनसे आग्रह किया कि वे ऐसे एलानियां बयान को वापस ले लें । आजम का ये आग्रह मुस्लिम कौम की भलाई के लिए नहीं किया गया बल्कि अपनी और समाज वादी पार्टी की भलाई के लिए किया गया। इसे ही कहते हैं राजनीति। एक तरफ देश और मुस्लिम वर्ग की भलाई के लिए इमाम के छोटे भाई स्ट्रेट फॉवर्ड होकर इटालियन गांधी परिवार की बहु सोनिया से बन्द कमरे में एक बड़ी डील होने का हवाला देकर इमाम के चेहरे पर पड़े नकाब को उतार देता है और उनकी असलियत को मुस्लिम समाज और इमाम के कुछ तथाकथित समर्थकों के सामने उनका असली चेहरा दिखा देता है। वहीं दूसरी ओर भारत माता को ‘डायनÓ कहने वाले मुलायम सिंह के अति निकट आजम खां की असलियत भी सामने आ जाती है। आजम खां अपनी कौम के लिए सिर्फ और सिर्फ कोरी बयानी और किताबी हमदर्द हैं वे भी इमाम की राह पर चलते रहे हैं। इस कौम के हमदर्द इन मठाधीशों ने कभी भी मुसलमानों के हक और हुकूक के लिए कोई ठोस काम नहीं किया । हां इतना जरूर किया कि अंग्रेजी हुकूमत की बैसाखी लेकर मुसलमानों को इस्लाम की दुहाई देकर उनके भोले पन को अपना वजूद कायम रखने के लिए भेड़ बकरियों के तरह इस्तेमाल किया। आज सभी जानते हैं सारा विश्व भी ये जानता है कि इसी देश में ंख्वाजा गरीब नवाज का प्रकाट्य हुआ जिस देश में तमाम संत, महात्मा और बुजुर्गानेदीन हुए हों उस देश में हिन्दु मुसलमान कभी भी अलग नहीं हो सकते। देश का हर एक मुसलमान जो सही मायने में इस्लाम को समझता और उसे अपनी जिन्दगी में उतारता है वो भी भारत माता की संतान है उसे भी इस देश से उतनी ही मोहब्बत है जितनी अन्य धर्मो व मजहब के लोगों को है लेकिन आज ऐसे ही इमाम और आंजम सरीखे लोगों ने खुद का तो जमकर विकास किया लेकिन जिस कौम का ये दम्भ भरते रहे उनको सिवाय इस्तेमाल करने के उनको आगे बढ़ाने की बजाए पीछे ही ढकेला। अब सवाल उठता है कि आज तक इस विशेष मुस्लिम वर्ग के साथ ऐसा घृणित कार्य क्यों किया गया । कहना शायद अनुचित न होगा कि ऐसे ही चंद नेता ये कतई नहीं चाहते कि मुस्लिम कौम का विकास हो और वे सभी क्षेत्रों में तरक्की करे क्योंकि वे भलीभंाति जानते हैं और समझते भी हैं कि अगर गरीब और भोला भाला मुस्लिम आगे बढ़ा तो इनकी दुकानों पर ताले लग जाएंगे और इनका वजूद भी खत्म हो जाएगा। अब एक खास और अहम बात गौर करने लायक है कि आज एक सच्चे मुसलमान याहया बुखारी ने अपने सगे बड़े भाई इमाम अहमद बुखारी की परवाह न करते हुए एक सच्चे देश भक्त होने का परिचय ही नहीं दिया बल्कि देश के करोड़ों भोले भाले और अपनों से ही धोखा खाए मुसलमानों को शाही इमाम और कांग्रेस का असली और भद्दा चेहरा दिखा दिया ।

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