sun pharmaपिछले कुछ समय मुश्किलों में फंसी फार्मा कंपनी रैनबैक्सी को सन फार्मा ने खरीद लिया है। सन फार्माए रैनबैक्सी की 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगीए वहीं 457 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 400 करोड़ डॉलर में यह सौदा हुआ है। सभी मंजूरियों के बाद यह सौदा दिसबंर 2014 तक पूरा होगा।
रैनबैक्सी के शेयरधारकों को 10 शेयर के बदले सन फार्मा के 8 शेयर मिलेंगे। इस सौदे के बाद अमेरिका में सन फार्मा सबसे बड़ी दवा कंपनी बन जाएगी। वहीं रैनबैक्सी को खरीदने के बादए सन फार्मा दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी जेनेरिक कंपनी होगी।
बता दें की जून 2008 में दाइची ने रैनबैक्सी को 450 अरब डॉलर में खरीदा था। वहीं इस सौदे के दौरान दाइची ने 737 रुपये प्रति शेयर के भाव पर रैनबैक्सी की 63ण्92 फीसदी हिस्सेदारी खरीदारी थी। लेकिन समय.समय पर रैनबैक्सी अमेरिकी एफडीए के राडार पर रहाए जिसके चलते एक दिग्गज फार्मा कंपनी होने के बावजूद रैनबैक्सी का कारोबार अक्सर दबाव में रहा।
जानिए कब.कब रैनबैक्सीए यूएफ एफडीए के शिकंजे में रहा.
16 सितंबर 2008 में रैनबैक्सी के देवास में पोंटा साहिब प्लांट के लिए यूएफ एफडीए की ओर से इंपोर्ट अलर्ट मिला। वहीं 25 फरवरी 2009 में पोंटा साहिब प्लांट पर नए रेगुलेटरी प्रतिबंध लगा दिए गए। 13 मई 2013 में पोंटा साबिह प्लांट में गड़बड़ी पाए जाने के चलते रैनबैक्सी पर 50 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया गया।
इसके अलावा 16 मई 2013 को रैनबैक्सी के मोहाली प्लांट में दवाओं के उत्पादन पर रोक लगा दी गई। वहीं 23 जनवरी 2014 में कंपनी के तौंसा प्लांट से भी दवाओं के उत्पादन और डिस्ट्रिब्युशन पर रोक लगा दी गई।

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