हरिद्वार: हरिद्वार महाकुंभ का स्वरूप इस बार बहुत छोटा होगा. सरकार ने महाकुंभ को सिर्फ 48 दिनों तक करने का निर्णय लिया है, इसलिए सरकार ने कुंभ का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया. जबकि इससे पहले जो भी कुंभ हुए हैं उनका नोटिफिकेशन अमूमन जनवरी में जारी होता था. लेकिन इस बार कोरोना की वजह से महाकुंभ के स्वरूप को ही बदल दिया गया है.
हरिद्वार महाकुंभ की तैयारियां पिछले 1 साल से चल रही है. सरकार महाकुंभ की तैयारियों में हर व्यवस्था बनाने की कोशिश में जुटी है. लेकिन कोरोना ने इस बार महाकुंभ के स्वरूप को ही बदल दिया. इसी वजह से सरकार  महाकुंभ को 48 दिनों में ही पूरा कर लेना चाहती है. तो वहीं कुंभ के आयोजन को लेकर अभी सरकार और संतों के बीच आपसी तकरार जारी है.
हाल ही में गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा ने कुंभ की शुरूआत को मकर संक्रांति पर्व के स्नान से कही थी. अब गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ट भी ये बात कह रहे हैं सरकार के नोटिफिकेशन के आधार पर कुम्भ भले ही 48 दिन का हो. लेकिन आस्था के आधार पर मकर संक्रांति, बसंत पंचमी स्नानों से कुंभ मान लिया जाएगा. क्योंकि कुंभ वर्ष होने के नाते लोग मान चुके हैं कि कुम्भ शुरू हो गया. वहीं उन्होंने ये बात भी कही कि कुंभ का स्वरूप छोटा होने से यहां के व्यापारियों पर भी बड़ा असर पड़ेगा.
सरकार और संतों के बीच तकरार जारी
वहीं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्री महेंद्र हरि गिरि महाराज कुंभ का स्वरूप छोटा  होने की वजह कोरोना को ही मानते हैं. उनका कहना है कि कुंभ के दौरान कोरोना की वजह से एक भी व्यक्ति की जान गई तो पूरी सरकार और कुम्भ मेला बदनाम हो जाएगा.
कुंभ के आयोजन को लेकर सरकार और संतों के बीच तकरार जारी है. सरकार 48 दिन में कुंभ कर लेना चाहती है. तो कुछ साधु संत कुंभ को ऐतिहासिक बनाने की कोशिश में जुटे हैं. लेकिन कोरोना और नोटिफिकेशन जारी ना होने से अभी तक हरिद्वार में साधु-संतों का जमावड़ा नहीं लगा है. इससे साफ जाहिर है कि साधु संत और अखाड़े भी नोटिफिकेशन के इंतजार में ही बैठे हैं.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.