दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया. ये लोग राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के लिए मार्च निकाल रहे थे जिसमें 2 करोड़ हस्ताक्षर थे. प्रियंका ने कहा कि बीजेपी की सरकार किसानों के पेट पर लात मार रही है और हमारा कर्तव्य है कि हम किसानों के साथ खड़े रहें इसलिए हम लोग अपना कर्तव्य निभाएंगे. हम पीछे नहीं हटेंगे.

नई दिल्ली:  कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों और सरकार के बीच गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है. किसान संगठनों ने बुधवार शाम को संयुक्त प्रेस कांफ्रेन्स की. योगेंद्र यादव ने कहा कि किसान संगठन सरकार से वार्ता करने के लिए तैयार हैं, खुले मन से वार्ता की मेज पर आने के लिए सरकार का इंतजार कर रहे हैं.
यादव ने कहा कि हम सरकार से आग्रह करते हैं जिन प्रस्तावों को हमने खारिज कर दिया है उसे नहीं दोहराएं बल्कि लिखित में ठोस प्रस्ताव के साथ आएं. किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि हम गृह मंत्री अमित शाह को पहले ही बता चुके हैं कि प्रदर्शनकारी किसान संशोधनों को स्वीकार नहीं करेंगे.
शिव कुमार कक्का ने कहा कि केंद्र को प्रदर्शनकारी किसानों के साथ वार्ता के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए.कक्का ने कहा कि सरकार को अपना हठी रवैया छोड़ देना चाहिए और किसानों की मांगों को मान लेना चाहिए. ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हन्नन मोल्ला ने कहा कि सरकार हमें थकाना चाहती है ताकि किसानों का आंदोलन खत्म हो जाए.

सरकार और किसानों के बीच कब-कब बातचीत हुई

सबसे पहले अक्टूबर में पंजाब के किसान संगठनों के नेताओं के साथ 14 अक्टूबर को कृषि सचिव से वार्ता हुई थी. इसके बाद 13 नवंबर को यहां विज्ञान-भवन में केंद्रीय मंत्रियों के साथ उनकी वार्ता हुई, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेलमंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री सोमप्रकाश मौजूद थे.
सरकार के साथ तीसरे, चौथे और पांचवें दौर की वार्ताएं क्रमश: एक दिसंबर, तीन दिसंबर और पांच दिसंबर को विज्ञान भवन में ही हुईं, जिनमें तीनों मंत्री मौजूद थे. इसके बाद आठ दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद सरकार की ओर से किसान संगठनों के नेताओं को कानूनों में संशोधन समेत अन्य मसलों को लेकर सरकार की ओर से एक प्रस्ताव नौ दिसंबर को भेजा गया, जिसे उन्होंने नकार दिया दिया था.

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