नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने संकेत दिया कि कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों और सरकार के बीच व्याप्त गतिरोध दूर करने के लिये वह एक समिति गठित कर सकता है क्योंकि यह जल्द ही एक राष्ट्रीय मुद्दा बन सकता है. सुप्रीम कोर्ट में आज फिर से इस मामले पर सुनवाई होगी. न्यायालय ने इन याचिकाओं पर केन्द्र और अन्य को भी नोटिस जारी किए.
इन्हें नोटिस जारी किया गया
न्यायालय ने जिन किसान यूनियनों को नोटिस जारी किये हैं, उनमें भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू-राकेश टिकैत), बीकेयू-सिदधुपुर (जगजीत एस दल्लेवाल), बीकेयू-राजेवाल (बलबीर सिंह राजेवाल), बीकेयू-लाखोवाल (हरिन्दर सिंह लाखोवाल) जम्हूरी किसान सभा (कुलवंत सिंह संधू), बीकेयू डकौंदा (बूटा सिंह बुर्जगिल), बीकेयू-दोआबा (मंजीत सिंह राय) और कुल हिंद किसान फेडरेशन (प्रेम सिंह भंगू) शामिल हैं.
इस मामले में कई याचिकायें दायर की गयी हैं, जिनमें दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को तुरंत हटाने के लिये न्यायालय में कई याचिकायें दायर की गयी हैं. इनमें कहा गया है कि इन किसानों ने दिल्ली-एनसीआर की सीमाएं अवरूद्ध कर रखी हैं, जिसकी वजह से आने जाने वालों को बहुत परेशानी हो रही है और इतने बड़े जमावड़े की वजह से कोविड-19 के मामलों में वृद्धि का भी खतरा उत्पन्न हो रहा है.
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे विरोध प्रदर्शन कर रही किसान यूनियनों को भी इसमें पक्षकार बनायें, न्यायालय इस मामले में बृहस्पतिवार को आगे सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया है.
याचिका दायर करने वाले लोग
न्यायालय में याचिका दायर करने वालों में कानून के छात्र ऋषभ शर्मा, अधिवक्ता रीपक कंसल और जी एस मणि भी शामिल हैं. याचिकाओं में विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने और इस विवाद का सर्वमान्य समाधान खोजने का अनुरोध किया गया है.
पीठ ने कहा, हम नोटिस जारी करेंगे और इसका जवाब कल (बृहस्पतिवार-17 दिसंबर) तक देना होगा क्योंकि शीतकालीन अवकाश के लिये शुक्रवार से न्यायालय बंद हो रहा है. पीठ ने मेहता को विरोध प्रदर्शन कर रही किसान यूनियन के नाम पेश करने का निर्देश दिया और याचिकाकर्ताओं से कहा कि उन्हें भी इसमें पक्षकार बनाया जाये. प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा, आपकी बातचीत से ऐसा लगता है कि बात नहीं बनी है.
बता दें कि नये कृषि कानूनों के विरोध मे नवंबर के अंतिम सप्ताह से ही दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान आन्दोलन, जिसमें मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के किसान हैं, के समाधान के लिये केन्द्र और किसान संगठनों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है. किसान संगठन इन कानूनों को खत्म करने की मांग पर अड़े हुये हैं और उन्होंने इन कानूनों में कुछ संशोधन करने के सरकार के प्रस्ताव को बार- बार ठुकरा दिया है.

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