मोहित सिंह की एक रिपोर्ट….par1
बात पांच माह पहले की है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले में दोषी करार दिया गया था, वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, चुनाव लडऩे से वंचित हो गए। कयास लगाया जा रहा था कि लालू के संसदीय क्षेत्र सारण में परिवार से इतर पार्टी के किसी अन्य नेता को मौका मिलेगा। लेकिन लालू ने सारण से अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मैदान में उतार दिया। 1997 में लालू जब चारा घोटाला मामले रांची कोर्ट में सरेंडर करने वाले थे उस समय भी राज्य का मुख्यमंत्री पद राबड़ी को ही सौंप गए थे।
इस बार लालू यहीं नहीं रूके। अपनी राजनैतिक विरासत को आगे बढाने के लिए उन्होंने पाटलिपुत्र सीट से लोकसभा टिकट अपने पुराने सहयोगी रामकृपाल यादव की बजाए अपनी बेटी मीसा भारती को दे दिया। मीसा कहती हैं, ”मेरा पक्ष इसलिए मजबूत है कि मैं लालू प्रसाद की बेटी हूॅ, महिला हूॅ और पाटलिपुत्र का विकास करना चाहती हॅू।ÓÓ राबड़ी और मीसा राजनीति में विरासत को आगे बढ़ानेकी बेहतरीन मिसाल हैं। विडंबना यह है कि प्रदेश की राजनीति में ज्यादातर उन्हीं महिलाओं को मौके मिले हैं, जिनका संबंध राजनैतिक घराने, प्रभावशाली व्यक्तित्व या बाहुबली परिवार से रहा है।
राजनैतिक पार्टियां महिलाओं को उम्मीदवार बनाए जाने के मामले में काफी पीछे हैं। प्रदेश की 40 लोकसभा सीटों के लिए तीन प्रमुख गठबंधनों (बीजेपी-एलजेपी-आरएलएसपी, कांग्रेस-आरजेडी-एनसीपी और जेडीयू-सीपीआइ) ने कुल 120 उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें सिर्फ 13 महिलाएं हैं। इनमें से भी ज्यादातर का संबंध या तो सियासी घराने से है या प्रभावशाली परिवारों से।
बीजेपी ने अपनी 30 लोकसभा सीटों में से सिर्फ दो पर महिलाओं को मौका दिया है तो उसकी सहयोगी एलजेपी ने सात में से सिर्फ एक पर। आरजेडी ने 27 में से पांच तो उसकी सहयोगी कांग्रेस ने 12 में से तीन सीटें महिलाओं को दी हैं, जेडी (यू) गठबंधन की हालत भी वैसी ही है। पंचायतों में 50 फीसदी आरक्षण देकर वाहवाही लूटने वाले जेडी (यू) ने 38 सीटों में से सिर्फ दो पर महिलाओं को उतारा है। सीपीआइएमएल ने 23 में से चार सीटों पर महिला उम्मीदवार उतारी हैं।
सियासी विरासत के कई उदाहरण हैं। सासाराम से कांग्रेस उम्मीदवार और लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार पूर्व उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी हैं। वे लगातार दो बार से सासारराम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। जगजीवन राम ने 1984 तक इस सीट से चुनाव लड़ा था।
पटना साहिब से आम आदमी पार्टी (आप) की उम्मीदवार पूर्व मंत्री परवीन अमानुल्लाह की सियासी पृष्ठभूमि मजबूत है। परवीन के पिता सैयद शहाबुददीन किशनगंज से जनता दल से सांसद थे। शहाबुददीन बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमेटी के प्रमुख नेता भी रहे। परवीन के पति अफजल अमानुल्लाह आइएएस अफसर हैं। परवीन ने 2010 विधानसभा चुनाव में साहेबपुर कमाल से जेडी (यू) से चुनाव लड़ा और समाज कल्याण मंत्री बनीं। पार्टी से इस्तीफा देकर वे आप से चुनाव लड़ रही हैं।
आरा से जेडी (यू) उम्मीदवार मीना सिंह बिस्कोमान के चेयरमैन रहे दिवंगत कांग्रेसी नेता तपेश्वर सिंह की पुत्रवधू और दिवंगत सांसद अजीत सिंह की पत्नी हैं। 2004 में अजीत जेडी (यू) से सांसद बने थे। बांका से बीजेपी उम्मीदवार पुतुल कुमारी भी सियासी घराने से हैं। वे बोका के दिवंगत सांसद दिग्विजय सिंह की पत्नी हैं। दिग्विजय समता पार्टी, जेडी (यू) और बतौर निर्दलीय बांका का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उनके आकस्मिक निधन के बाद 2010 के उप-चुनाव में पुतुल निर्दलीय जीती थीं जिसमें जेडी (यू) से सहयोग किया था, लेकिन पिछले महीने वे बीजेपी में शामिल हो गई।
शिवहर की बीजेपी उम्मीदवार रमा देवी के दिवंगत पति बृजबिहारी प्रसाद आरजेडी सरकार में मंत्री थे। 2009 में राम बीजेपी से जीती थीं, उन्हें इस बार भी मौका दिया गया है। काराकाट से आरजेडी उम्मीदवार कांति सिंह के पति केशव कुमार सिंह लालू प्रसाद के करीबी रहे हैं।
राजनीति और अपराध का गठजोड़ तो पुराना है। जब बाहुबली संगीन आरोपों में फंस चुनाव नहीं लड़ पाए, तब पार्टियों ने उनकी पत्नियों का मौका दिया। खगडिय़ा से आरजेटी की लोकसभा उम्मीदवार कृष्णा कुमार यादव के पति रणवीर यादव लक्ष्मीपुर तौफिर दियारा नरसंहार के सजायाफ्ता हैं।
आरजेडी ने सीवानके पूर्व सांसद शहाबुददीन की पत्नी हीना शहाब को दूसरा मौका दिया है। वे 2009 के चुनाव में हार गई थीं। शहाबुददीन हत्या, अपहहरण जैसे संगीन आरोप में सीवान जेल में बंद हैं। लेकिन उस क्षेत्र में उनका दखल अब भी मजबूत है। उधर, एलजेपी ने मुंगेर से वीणा देवी को मौका दिया है। वीणा एलजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूरजभान सिंह की पत्नी हैं। बलिया से सांसद रहे सूरजभान आपराधिक मामले में दोषी ठहराए गए हैं। और चुनाव नहीं लड़ सकते। एलजेपी ने वीणा को 2009 में भी नवादा से मौका दिया था।
ऐसी ही वजहों से सपा ने शिवहर से पूर्व सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को मौका दिया है। आनंद मोहन आइएएस अधिकारी जी। कृष्णैया की हत्या मामले में जेल में हैं। वे दो बार शिवहर से सांसद रह चुके हैं। वैशाली के उप-चुनाव में जीत कर लवली सांसद बनी थीं।
कांग्रेस ने पूर्व सांसद रंजीत रंजन को सुपौल से दोबारा मौका दिया है। रंजीत पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पत्नी हैं। पप्पू को पूर्णिया के सीपीएम नेता अजीत सरकार हत्याकांड में दोषी करार दिया गया था, तब कांग्रेस ने 2009 में रंजीत को पहला मौका दिया था। कोर्ट से बरी होने के बाद इस चुनाव में आरजेडी ने पप्पू को मधेपुरा से उतारा है। उजियारपुर से जेडी (यू) सांसद अश्वमेध देवी को पार्टी ने दोबारा मौका दिया है। उनके पति प्रदीप महतो जेडी (यू) नेता रहे हैं जिनकी हत्या कर दी गई थी। दूसरी ओर मुजफ्फरपुर जेल में बंद मुन्ना शुक्ल की पत्नी और जेडी (यू) विधायक अन्नू शुक्ल ने वैशाली से टिकट नहीं मिलने पर बतौर निर्दलीय लडऩे की घोषणा कर दी है।
हालांकि बिहार विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। 34 महिला विधायकों के साथ राज्य विधानसभा में उनकी 14 फीसदी भागीदारी है, जो देश में सर्वाधिक है, लेकिन संसद में महिलाओं की भागीदारी के सवाल पर पार्टियां कदम पीछे रखे हुए हैं। 2009 में बिहार से सिर्फ 4 महिलाएं संसद में पहुंची थीं। पटना यूनिवर्सिटी में प्रो0 डे0जी0 नारायण कहती हैं, ”हमारा समाज प्रधानमंत्री जैसे पदों पर महिलाओं को स्वीकार कर लेता है, लेकिन संसद सहित निर्णय करने वाली संस्थाओं में महिलाओं को स्वीकार नहीं कर रहा।ÓÓ

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