modi n joshiबीजेपी सात अप्रैल को पार्टी का घोषणापत्र जारी करेगी। सात अप्रैल को ही लोकसभा के लिए पहले चरण का मतदान है। ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर घोषणापत्र को जारी करने में इतनी देरी क्यों।
सूत्रों के मुताबिक नरेंद्र मोदी और मुरली मनोहर जोशी में एक राय ना बन पाने की वजह से घोषणापत्र को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। घोषणापत्र का ड्राफ्ट जोशी ने तैयार किया है लेकिन मोदी इसमें बदलाव चाहते हैं। बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी देशभर में रैली करके विकास पर पार्टी का नजरिया पेश कर रहे हैंए लेकिन पार्टी का विजन और लोगों से किए जा रहे वादे अभी तक घोषणापत्र की शक्ल नहीं अख्तियार कर सके हैं।
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पार्टी के पुराने नेताओं की सोच और मोदी का नजरिया मेल नहीं खा रहेए और यही वजह है कि अभी तक घोषणापत्र जारी नहीं हो सका है। अब पार्टी पहले चरण के मतदान के दिन यानी 7 अप्रैल को घोषणापत्र जारी करेगी।
सूत्रों के मुताबिक ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी ने घोषणापत्र के ड्राफ्ट में अर्थव्यवस्था का स्वदेशी मॉडल पेश किया है। लेकिन मोदी चाहते हैं कि इसमें निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाने पर साफ राय रखी जाए। मोदी चाहते हैं कि घोषणापत्र में वादे को अमली जामा पहनाने के तरीके का भी जिक्र हो।
मोदी की मांग है कि घोषणापत्र में कृषि और शिक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाने की बात हो। परिवहनए पर्यटन और तकनीक के विकास पर जोर दिया जाए। बीजेपी को उम्मीद है कि इन मुद्दों को 7 अप्रैल से पहले सुलझा लिया जाएगा। लेकिन घोषणापत्र पर हो रही इस देरी ने विपक्ष को हमले का मौका दे दिया है।

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