नई दिल्ली. दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। ये आंदोलन न सिर्फ बड़ा होता जा रहा है बल्कि सियासी दल भी अब खुलकर किसानों के पक्ष में आने लगे हैं। आज सिंघू बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में पूर्व बॉक्सर और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ विजेंद्र सिंह किसानों को अपना समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने कहा,  “अगर सरकार ये काले कानून वापस नहीं लेती तो मैं सरकार को खेल का सबसे बड़ा सम्मान राजीव गांधी खेल पुरस्कार वापस करूंगा।”
कांग्रेस और AAP ने किया किसानों के भारत बंद का समर्थन
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संघों द्वारा आठ दिसंबर को आहूत ‘भारत बंद’ के प्रति कांग्रेस ने रविवार को पूरा समर्थन जताया और घोषणा की कि इस दिन वह किसानों की मांगों के समर्थन में सभी जिला एवं राज्य मुख्यालयों में प्रदर्शन करेगी। कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मैं यहां घोषणा करना चाहता हूं कि कांग्रेस आठ दिसंबर को होने वाले भारत बंद को पूरा समर्थन देती है।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ट्रैक्टर रैलियों, हस्ताक्षर अभियानों और किसान रैलियों के जरिए किसानों के पक्ष में पार्टी की आवाज बुलंद कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी के नेता और केजरीवाल सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कहा कि हमने सुना था कि कोर्ट में तारीख पर तारीख पड़ती है,समाधान नहीं आता।पहली बार देख रहे हैं कि किसान ठंड से ठिठुर रहे और सरकार वार्ता के नाम पर केवल टालमटोल कर रही है। किसान मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाए तो सरकार जबरदस्ती उसके फायदे गिना रही है। उन्होंने कहा कि 8 दिसंबर को किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी AAP पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भारत बंद का समर्थन करने का आह्वान किया है।
शरद पवार बोले- विधेयक जल्दबाजी में पारित किया गया
पूर्व कृषि मंत्री और एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा कि पंजाब और हरियाणा के किसान गेहूं और धान के मुख्य उत्पादक हैं, और वे विरोध कर रहे हैं। अगर जल्द ही स्थिति का हल नहीं किया गया, तो हम देश भर के किसानों को उनके साथ जो देखेंगे। उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि जब बिल पारित किया जा रहा था, हमने सरकार से अनुरोध किया कि वे जल्दबाज़ी न करें, इसे सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना चाहिए और चर्चा की आवश्यकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और विधेयक जल्दबाजी में पारित किया गया। अब सरकार को जल्दबाजी के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार बोली- कृषि कानून किसानों को आज़ादी देने वाला
केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि कल जो बैठक हुई उसमें किसानों के सुझाव पर विचार-विमर्श किया गया। कृषि कानून किसानों को आज़ादी देने वाला कानून है। किसानों को अगर लगता है कि इसमें कुछ संशोधन की जरूरत है तो सरकार ने भी कहा है अगर आवश्यकता हुई तो हम संशोधन करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं सभी किसान भाईयों से कहना चाहूंगा कि भारत बंद करने से देश का आर्थिक नुकसान होगा इसलिए मैं उन्हें थोड़ा पीछे हटने के लिए कहूंगा क्योंकि पीएम मोदी जी के नेतृत्व में जिस तरह से किसानों के हित में काम हुए उस तरह पहले कभी नहीं हुआ।”

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