नई दिल्ली। केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज शुक्रवार (4 दिसंबर) को 9वां दिन है। नए कृषि कानूनों पर सरकार के साथ जारी बातचीत के बीच किसान अपनी मांगों को लेकर किसी भी सूरत में झुकने को तैयार होते नजर नहीं आ रहे हैं। दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने वाले सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान संगठनों ने शुक्रवार शाम को प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो 5 दिसंबर यानि कल शनिवार को देशभर में पीएम मोदी के पुतले जलाएंगे और 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया जाएगा।
बता दें कि, 5 दिसंबर (शनिवार) को ही सरकार और किसान संगठनों के नेताओं के बीच पांचवें दौर की बातचीत दोपहर 2 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होगी। किसान संगठनों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम कानून हटाना चाहते हैं, जबकि सरकार कानूनों में बदलाव करने के लिए तैयार है। एमएसपी पर कानून बनाने के लिए भी तैयार है, लेकिन हम कानून वापस करवाकर ही दम लेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सर्वसम्मति से कुछ फैसले किया गए हैं। 8 दिसंबर को भारत बंद होगा। गौरतलब है कि, किसान आंदोलन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में किसान आंदोलन को हटाने की मांग की गई है।
5 दिसंबर को मोदी सरकार और कॉर्पोरेट घरानों के पुतले फूंकेंगे किसान
सिंघु बॉर्डर से भारतीय किसान यूनियन (लखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी एचएस लखोवाल ने कहा कि 5 दिसंबर को मोदी सरकार और कॉर्पोरेट घरानों के पुतले पूरे देश में फूंके जाएंगे। 7 तारीख को सभी वीर अपने मेडलों को वापिस करेंगे। 8 तारीख को हमने भारत बंद का आह्वान किया है व एक दिन के लिए सभी टोल प्लाज़ा फ्री कर दिए जाएंगे। लखोवाल ने कहा कि कल हमने सरकार से कहा कि कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए। हमने 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है।
वहीं, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हमें इस आंदोलन को और तेज करने की जरूरत है। सरकार को कृषि कानूनों को वापस लेना ही पड़ेगा। मोल्लाह ने कहा कि इसे सिर्फ पंजाब आंदोलन बोलना सरकार की साजिश है मगर आज किसानों ने दिखाया कि ये आंदोलन पूरे भारत में हो रहा है और आगे भी होगा। हमने फैसला लिया है कि अगर सरकार कल कोई संशोधन रखेगी तो हम संशोधन स्वीकार नहीं करेंगे।
कल होने वाली बैठक को लेकर किसानों की चेतावनी
दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर तीनों कृषि बिलों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि अगर शनिवार को होने वाले एक और दौर की चर्चा में कोई फैसला नहीं होता है, तो वे दिल्ली में ज्यादा सड़कें और खाद्य उत्पादों की आपूर्ति ठप करके विरोध प्रदर्शन को तेज करेंगे। किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर डटे किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि तीनों नए कृषि कानूनों के खिलाफ 8 दिसंबर को एक दिन का भारत बंद बुलाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा किसान आंदलोन
नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को तुरंत वहां से हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कोविड-19 का हवाला देते हुए मांग की गई है कि आंदोलनरत किसानों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए जाएं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका ऋषभ शर्मा ने दायर की है। याचिका में दिल्ली NCR में कोरोना के खतरे को देखते हुए किसानों को हटाने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि किसानों के इतनी बड़ी संख्या में जमा होने से कोरोना के कम्यूनिटी स्प्रैड का खतरा बढ़ गया है, इसलिए इनको तुरंत हटाया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी किसानों ने रोड बंद कर दिया है, जिससे एमरजेंसी/ मेडिकल सर्विस भी प्रभावित हुई है। दिल्ली में बड़े सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के लिए लोग दिल्ली आते हैं, जिनको दिक्कत हो रही है। 26 नवंबर को दिल्ली पुलिस ने किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए बुराड़ी निरंकारी मैदान में प्रदर्शन की मंजूरी दी थी, जिसको किसानों ने ठुकरा दिया।
किसान आंदोलन के चलते ट्रैफिक रूट डायवर्ट
किसान आंदोलन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक के तमाम रूट डायवर्ट कर दिए हैं। इसमें टिकरी बॉर्डर, झरोदा बॉर्डर को ट्रैफिक मूवमेंट के लिए बंद कर दिया गया है। बाडूसराय बॉर्डर हल्के वाहनों जैसे कार और दोपहिया वाहनों के लिए खुला है। हरियाणा के लिए धंसा, दौराला, कापासहेड़ा, रजोकरी NH8, बिजवासन, पालम विहार और डूंडाहेड़ा बॉर्डर खुले हुए हैं।
इसके अलावा सिंघु और औचंडी प्याऊ मनियारी और सबोली बॉर्डर बंद किए हुए हैं, NH-4 को बंद किया गया है। मुंडका मुकरबा और जीटी करनाल रोड से ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है। पुलिस का कहना है कि आउटर रिंग रोड करनाल रोड और एनएच 44 पर जानें से बचें।

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