नई दिल्ली: केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कहा कि पराली का जलना बंद हो गया है लेकिन दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति अब भी गंभीर है. साथ ही उन्होंने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार से सीपीसीबी द्वारा भेजी गई शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने की भी अपील की. मंत्री ने कहा कि बायोमास और कचरा जलाने, अनुचित अपशिष्ट निपटान, निर्माण नियमों नियमों का उल्लंघन, कच्ची सड़कों और धूल संबंधी कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे प्रदूषण बढ़ता है.
जावड़ेकर ने एक संदेश में कहा कि शीर्ष प्रदूषण निगरानी निकाय ‘केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (सीपीसीबी) ने दिल्ली सरकार को दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के बारे में शिकायतों पर त्वरित एवं कड़ी कार्रवाई करने के लिए एक नोटिस भी जारी किया है. जावड़ेकर ने कहा, ‘‘ दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति गंभीर है. पराली जलाना बंद हो गया है, लेकिन दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अब भी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है.’’
उन्होंने कहा, ‘‘ सीपीसीबी की 50 टीमें हर दिन दिल्ली और एनसीआर का निरीक्षण करती हैं और संबंधित एजेंसियों को शिकायतें भेजती हैं और अवलोकन प्रस्तुत करती हैं. अभी कुछ काम हए हैं और कुछ काम बाकी हैं. इसलिए, सीपीसीबी ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर भेजी गईं शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने को कहा है.’’
जावड़ेकर ने कहा, ‘‘ दिल्ली सरकार और सभी संबंधित एजेंसियों को अब त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि पराली जलाना अब बंद हो गया है.’’ सीपीसीबी ने दिल्ली सरकार को एक नोटिस जारी कर टायर ‘पायरोलिसिस’, टायर और अन्य कचरे को जलाने से होने वाले प्रदूषण को लेकर कड़ी कार्रवाई करने को कहा है.
पराली जलाने की घटनाओं में इस साल 20 फीसदी की बढ़ोतरी: वायु गुणवत्ता आयोग
पराली जलाने की घटनाओं में पिछले दो सालों की तुलना में इस साल 20 फीसद से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पड़ोसी राज्यों की वायु गुणवत्ता प्रबंधन को लेकर गठित एक आयोग के सदस्य के जे रमेश ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.
रमेश ने बताया कि ‘एयर क्वालिटी मैनेजमेंट इन द नेशनल कैपिटल रिजन एंड एड्ज्वाइनिंग एरियाज’ ने विभिन्न पक्षों से इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की है और उन्हें विश्वास है कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अगले साल तक ‘सभी को स्वीकार योग्य और उपयुक्त समाधान’ निकाला जाएगा.

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