लखनऊ: हाथरस गैंगरेप कांड के बाद उपजे तनावपूर्ण हालात का फायदा उठाते हुए पीएफआई जातीय हिंसा भड़काने की साजिश रच रही थी, लेकिन समय रहते एसटीएफ ने कार्रवाई की, जिससे वह अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाए.
सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ के द्वारा पकड़े गए पत्रकार सिद्धकी कप्पन कुछ दिन पहले ही दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन गया हुआ था. वहीं दानिश नाम का एक आरोपी भी है, जो 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे का आरोपी है. यह सभी लोग हाथरस में जातीय हिंसा भड़काने की साजिश रच रहे थे. एसटीएफ ने आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तो कई अहम जानकारियां भी हाथ लगी हैं. एसटीएफ पकड़े गए सभी पीएफआई के सदस्यों के लिए हुई फंडिंग की भी जांच कर रही है.
हाथरस में जातीय हिंसा भड़काने की थी साजिश
मथुरा से पकड़े गए पीएफआई के लोगों को रिमांड पर लेकर एसटीएफ ने पूछताछ की तो कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं. पता चला है कि पकड़े गए पत्रकार सिद्धकी कप्पन पीएफआई का ऑफिस सेक्रेटरी है, जो कुछ दिनों पहले केपटाउन भी गया हुआ था. वहीं केपटाउन के लिए किसने फंडिंग की इसकी भी जांच हो रही है. दानिश नाम का एक आरोपी भी पकड़ा गया है, जो दिल्ली में हुई हिंसा का आरोपी है. इसके पहले मुजफ्फरनगर की हिंसा का भी वह आरोपी था.
पीएफआई के सदस्यों को हुई फंडिंग की हो रही है जांच
हाथरस में जातीय हिंसा की साजिश कर रहे पीएफआई के चार सदस्यों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है तो वहीं इस मामले में ईडी भी जांच कर रही है. पीएफआई के पकड़े गए सदस्यों को हुई फंडिंग के मामले में की जांच की जा रही है. यही नहीं हाथरस को लेकर बनाई गई वेबसाइट के कनेक्शन की भी जांच हो रही है.
पीएफआई के सदस्यों को हुई फंडिंग के मामले में मिली अहम जानकारी
पीएफआई की तरफ से पकड़े गए पत्रकार सिद्धीक कप्पन और पीएफआई के जनरल सेक्रेटरी रऊफ शरीफ के बैंक खातों की पड़ताल से एसटीएफ को काफी जानकारी मिली है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, संगठन के कुछ सदस्यों का इस्लामिक संगठनों से गहरा तार जुड़ा हुआ है. उन्हें कई इस्लामिक देशों से फंडिंग भी मिली है, जिसकी जांच जारी है.
पीएफआई को विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा फंडिंग किए जाने के मामले में एसटीएफ के अधिकारी केंद्रीय खुफिया एजेंसी के संपर्क में है. पीएफआई के सदस्यों को हाथरस भेजने में रऊफ शरीफ और पी कोया का हाथ बताया जा रहा है. पी कोया के बारे में एसटीएफ को मिली जानकारी में उनके इस्लामिक संगठनों से तार भी जुड़े होने के सबूत मिले हैं

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