लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लंबे समय से खाली चल रहे मुख्य सूचना आयुक्त के पद को भरने के लिए जारी विज्ञापन को रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया.
सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने दाखिल की थी याचिका

सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए जारी विज्ञापन को रद्द करने मांग करते हुए रिट याचिका दाखिल की थी. जिसे न्यायमूर्ति पंकज मित्तल व न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने खारिज कर दिया. याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने पहले इस संबंध में नवम्बर 2019 में विज्ञप्ति निकाली थी तथा जनवरी 2020 में प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग करने के बाद फरवरी 2020 में मुख्यमंत्री के अधीन तीन सदस्यीय चयन समिति का गठन भी किया जा चुका था. ऐसे में प्रक्रिया पूरी होने के समय दोबारा विज्ञापन निकाला जाना पूरी तरह अवैधानिक है और इस मामले में जानबूझ कर देरी की जा रही है. याचिकाकर्ता ने इसे किसी खास आदमी को नियुक्त करने का प्रयास बताते हुए विज्ञापन को तुरंत निरस्त करने तथा पूर्व विज्ञप्ति के आधार पर अविलंब नियुक्ति किए जाने की मांग की थी.

कोर्ट ने अपने आदेश में ये कहा

न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि याचिका न तो जनहित में दाखिल की गई है और न ही प्रतिनिधित्व के रूप में. न्यायालय ने आगे कहा कि याची के किसी अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है. न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि पद भरने के लिए विज्ञापन जारी करने में न्याय की कोई अनदेखी भी नहीं की गई है. याची ने विज्ञापन को गलत तरीके से जारी करने का तर्क देकर उसे रद्द करने की मांग की थी. न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही 3 नंवबर 2020 को विज्ञापन जारी कर दिया है, लिहाजा यह विश्वास किया जा सकता है कि जल्द ही रिक्ति भर दी जाएगी.

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