राजनीति के मैदान पर किस्मत आजमा रहीं महिलाओं पर दबंग दुनिया मुम्बई के डिप्टी न्यूज एडीटर रोहित तिवारी का जानकारीपरक लेख:
महिलाओं की राजनीति में आरक्षण मिलने के बाद ऐसा लग रहा था कि वे बहुत जल्द सत्ता की बागडोर अपने हाथ में संभाल लेंगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। स्थानीय निकायों में जहां नेताओं, नगर सेवकों ने अपनी पत्नियों को चुनावी मैदान में उतरवाया, वहीं मंत्रियों ने अपनी बहू-बेटियों को सत्ता की बागडोर सौंप दी। जिस उद्देश्य से महिलाओं को आरक्षण सुलभ करवाया गया था कि उन्हें दबा-कुचला वर्ग समझकर राजनीति की बीच धारा में अवसर उपलब्ध कराया जाए, ताकि सामान्य महिला भी राजनीति का मुश्किल सफर आसानी से पूरा कर सके।
राजनीतिज्ञों की दलीलें
लोकसभा के टिकट वितरण को लेकर लगभग सभी दलों में भारी असंतोष व्याप्त है। लगभग हर राजनीतिक पार्टी ने महिलाओं के टिकट वितरण में संकुचित वृत्ति अपनाई है, जबकि राज्य में लगभग 42 फीसदी महिलाएं वोटर हैं। कांग्रेस, शिवसेना जैसी बड़ी पार्टियों ने इक्का-दुक्का महिलाओं को टिकट देकर जहां रश्म अदायगी की है, वहीं सपा और मनसे जैसी पार्टियों ने महिलाओं को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है। कांग्रेस, भाजपा, राष्ट्रवादी कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टियों ने महिलाओं को टिकट देने के नाम पर राजनीतिक उत्तराधिकारियों को उनकी विरासत सौंपने का काम किया है। इनका खुद का कोई वजूद नहीं है। इनका वजूद इनके पिता के बलबूते के कारण है व दमदार हो गया है। अक्सर राजनीतिक लोग यह बहस छेड़ते हैं कि राजनीति वंशवाद की पोशक है, लेकिन जब उन पर यह मामला आता है तो वे पुरानी दलीलें देने लगते हैं कि डॉक्टर का बेटा डॉक्टर और वकील का बेटा वकील बन सकता है तो राजनीतिज्ञ के रिश्तेदार राजनीति क्यों नहीं कर सकते…
सुप्रिया को मिले थे सबसे ज्यादा वोट
सन् 2009 के लोकसभा चुनाव में इस बार के मुकाबले ज्यादा महिलाओं ने टिकट हासिल किया था। करीब 55 महिलाएं पिछले लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरी थीं, जिनमें से 45 महिलाओं की जमानत जप्त हो गई थी। विजयी उम्मीदवारों में सुप्रिया सुले, प्रिया दत्त और भावना गवली शामिल थीं, लेकिन इन तीनों में सबसे ज्यादा वोट शरद पवार की बेटी सुप्रिया ने हासिल किए थे।
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चुनिंदा लोगों से होगा सामना
इस बार चुनाव में उतरी महिला उम्मीदवारों में कांग्रेस की प्रिया दत्त, राष्ट्रवादी कांग्रेस की सुप्रिया सुले, नवनीत राणा, भारती पवार, भाजपा की पूनम महाजन, रक्षा खडसे, हिना गाविद, शिवसेना की भावना गवली, महाराष्ट्र लोकशादी आघाड़ी की प्राध्यापक अंजलि पटले, मनीषा पवार, बसपा की किरण पाटंकर, पुष्पा भोले, आप की मेधा पाटकर, अंजलि दमानिया, मीरा सान्याल, भावना वासनिक, दीपाली सैयद, सलमा कुलकर्णी, समीना खान, सविता शिंदे अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार हैं।
चर्चित चेहरे
मेधा पाटकर- नमृदा बचाओ आंदोलन की सूत्रधार मेधा पाटकर मुंबई में कई मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर चुकीं हैं। जिनमें मुंबई में मील मजदूरों के लिए मकान, महाराष्ट्र में सिंचाई भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन, सांताक्रुज गालीबार इलाके में एसआरए योजना के लिए बिल्डरों द्वारा डाला गया दबाव आदि जैसे कई आंदोलनों का नेतृत्व करने वाली मेधा पाटकर ईशान्य मुंबई से आम आदमी पार्टी के टिकट परचुनाव मैदान में उतरी हैं। उनके सामने एनसीपी के संजय पाटिल और भाजपा के किरीट सोमैया जैसे धुरंधर हैं।
सुप्रिया सुले- राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की इकलौती संतान सुप्रिया सुले बारामती से लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं। बारामती पर हमेशा ही पवार परिवार का कब्जा रहा है। पिछले चुनाव में शरद पवार ने इस निर्वाचन क्षेत्र की विरासत सुप्रिया के हाथों सौंपकर माढा निर्वाचन क्षेत्र से स्वयं चुनाव लड़ा था। सुप्रिया सुले ने पिता की परछाई से हटकर महिला बचत गुटों को संगठित करना, राष्ट्रवादी युति संगठन को गांव-गांव तक पहुंचाना आदि जैसे सामाजिक कार्य किए हैं। इस बार इनका मुकाबला महायुति के उम्मीदवार महादेव जानकर से होगा।
POONAM_MAHAJAN– महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना युति के शिल्पकार के रूप में प्रमोद महाजन की पहचान है। प्रमोद महाजन चाहते थे कि उनका बेटा राहुल उनकी विरासत संभाले, लेकिन प्रमोद की मौत के बाद राहुल महाजन विवादों का कारण बने और भाजपा ने राहुल के बदले पूनम को संगठन की जिम्मेदारी सौंप दी। पूनम ने भारतीय जनता पार्टी के संगठन में निचले स्तर पर कार्य शुरू किया। इस बार वे उत्तर-पश्चिम मुंबई निर्वाचन क्षेत्र से प्रिया दत्त के विरुद्ध चुनाव मैदान में हैं।
प्रिया दत्त- सुनील दत्त की मौत के बाद प्रिया दत्त ने शिवसेना के मधुकर पोद्दार को हराकर मुंबई उत्तर-पश्चिम सीट पर कब्जा जमा लिया। पिछले दो चुनाव से वे लगातार जीत हासिल करती आई हैं। अब तीसरी बार वे जीत के लिए भाजपा की उम्मीदवार पूनम महाजन से संघर्ष करेंगी।
अंजलि दमानिया- आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता नितिन गडकरी के खिलाफ मोर्चा खोला था। साथ ही सिंचाई विभाग के घोटालों पर उन्होंने ठेकेदार और सरकार के बीच बैठे लोगों के बीच के रिश्तों को उजागर किया था। इस बार वे नागपुर से नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।
मीरा सान्याल- आम आदमी पार्टी के दक्षिण मुंबई से उम्मीदवार मीरा सान्याल इंवेस्टमेंट बैंकर हैं। वे एबीएन एमीरो बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुकी हैं। इसके अलावा वे एक एनजीओ भी चलाती हैं। उनके पिता एडमिरल हीरानंदानी भारतीय नवसेना में थे। मीरा सान्याल पिछली बार दक्षिण मुंबई से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकी हैं। इस बार उनका सामना कांग्रेस के मिलिंद देवड़ा से होगा।
हिना गावित- डॉक्टर हिना गावित भारतीय जनता पार्टी की नंदूरबार से लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र की उम्मीदवार हैं। वे महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके विजय कुमार गावित की बेटी हैं और महाराष्ट्र से सर्वाधिक बार सांसद निर्वाचित हो रहे माणिक राव गावित के सामने प्रत्याशी हैं। वे लगातार नौ बार सांसद रहे माणिकराव गावित के खिलाफ सशक्त उम्मीदवार के रूप में उभरीं हैं। अगर हिना गावित माणिकराव गावित को चुनाव में हराती हैं तो वे एक मात्र आदिवासी नेत्री बनेंगी, जो लोकसभा में महाराष्ट्र की आवाज उठाएंगी।
नवनीत राणा- अमरावती में बाबा रामदेव द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों में नवनीत कौर ने रवि राणा के साथ स्वयंवर में ब्याह रचाया और चर्चा में आर्इं। रवि राणा अमरावती के बडनेरा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक हैं। राणा ने नवनीत को एनसीपी से टिकट दिलवाया है। तेलुगू फिल्मों की अभिनेत्री नवनीत क्षेत्र में खासी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने शिवसेना के कद्दावर नेता आनंदराव अडसुल के चुनाव से पहले ही पसीने छुड़ा दिए हैं।

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