लखनऊ: उत्तर प्रदेश की 7 विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम 10 नवंबर को आने वाले हैं. यह चुनाव परिणाम कई मायनों में न सिर्फ खास होंगे बल्कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की भविष्य की राजनीति की रणनीति की दिशा तय करने वाले होंगे. यह बात इसीलिए महत्वपूर्ण है कि पिछले कुछ दिनों से जहां एक तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती भाजपा को लेकर सॉफ्ट हैं तो उपचुनाव को बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दी.
बसपा को तय करना होगा बीजेपी को लेकर आगामी रणनीति 
सबसे अहम बात यह है कि उपचुनाव के परिणामों में अगर बहुजन समाज पार्टी की स्थिति ठीक नहीं रहती है तो फिर बसपा सुप्रीमो मायावती के सामने काफी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. ऐसे में बसपा को तय करना होगा कि भविष्य में राजनीति और तमाम मुद्दों को लेकर बीजेपी के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर के आधार पर आगे बढ़ना है. अगर नहीं तो भाजपा के खिलाफ आक्रामक रूख रखते हुए विधानसभा चुनाव की तैयारी करनी होगी.
भाजपा को घेरने के बजाय सॉफ्ट कॉर्नर से बढ़ी हैं मुश्किलें 
बसपा सुप्रीमो मायावती का पिछले कुछ समय से लगातार बीजेपी की केंद्र सरकार हो या फिर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को तमाम मुद्दों पर घेरने के बजाय सॉफ्ट कॉर्नर दिखाती हुई नजर आई हैं. सबसे खास बात यह है कि पिछले दिनों राज्यसभा चुनाव के दौरान बसपा के बागी विधायकों को निलंबित करने के दौरान मायावती का कहना समाजवादी पार्टी को हराने के लिए भाजपा का भी साथ दे सकती हैं. उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में यह बात साफ हो गई कि मायावती बीजेपी की बी टीम के रूप में उत्तर प्रदेश में काम कर रही हैं. इससे बसपा की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आईं और बसपा पूरी तरह से बैकफुट पर ही दिखी.
बसपा पर लगा भाजपा की ‘बी टीम’ होने का आरोप
यूपी में समाजवादी पार्टी व कांग्रेस पार्टी ने खुलकर ये आरोप लगाए कि बसपा भाजपा की ही बी टीम है. इसीलिए यह दोनों दल आपस में तय करके रणनीति निर्धारित करते हैं. विपक्षी पार्टियों की तरफ से इस प्रकार की बात सामने आई तो मायावती बैकफुट पर नजर आने लगीं. इसके फौरन बाद बसपा की तरफ से सफाई भी पेश की गई कि उनका भाजपा से कोई समझौता नहीं है. वह सिर्फ समाजवादी पार्टी को हराने के लिए भाजपा का साथ देने की बात कही थी, लेकिन मायावती के पहले के बयान बसपा के नेताओं में भी नाराजगी देखने को मिली. अंदरखाने की बातचीत में बसपा के नेताओं ने कहा कि बसपा के लिए यह स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं है.
दलितों के साथ ही मुस्लिम वोटर हो सकते हैं बसपा से दूर
बसपा के जो दलित वोटर हैं खासकर पिछले कुछ चुनाव में जिस प्रकार से मुसलमानों का साथ बसपा को मिला है. ऐसे में अगर बसपा बीजेपी के साथ खड़ी हुई नजर आती है तो मुसलमान समाज के लोग बसपा से दूर हो सकता है. इसके साथ ही आगामी चुनाव में बसपा को इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है.
वोट फीसद भी बताएंगे बसपा की जमीनी हकीकत
ऐसे में अब जब उपचुनाव के परिणाम आ रहे हैं तो भविष्य में बहुजन समाज पार्टी की राजनीति क्या होगी जरूर होगा बसपा को उपचुनाव में 1-2 सीट मिल पाती है या नहीं. सबसे खास बात यह होगी कि बसपा को कितने प्रतिशत वोट मिला. ऐसे में यह बात सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी किस दिशा में आगे बढ़ेगी.
किस दिशा में आगे बढ़ेगी बसपा, मायावती को करना होगा तय
बसपा सुप्रीमो मायावती को तय करना होगा कि भाजपा को लेकर उनका जो सॉफ्ट कॉर्नर है, उस पर कायम रहेंगी. या फिर आने वाले समय में बीजेपी की सरकारों के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए उनसे दूर हुए मतदाताओं को सहेजने के लिए क्या कुछ रणनीति तैयार करती हैं.

मायावती के बयान से बसपा के मतदाताओं में है नाराजगी

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. दिलीप अग्निहोत्री कहते हैं कि पिछले कुछ समय से जिस प्रकार से बहुजन समाज पार्टी की रणनीति भाजपा को लेकर सॉफ्ट कॉर्नर की रही है. ऐसे में बसपा के मतदाताओं में खासकर मुसलमान समाज में इसकी नाराजगी देखने को मिल रही है. इसलिए पिछले दिनों कुछ विधायक भी बागी हो गए थे. अब चुनाव के परिणाम सामने आ रहे हैं तो सारी स्थिति साफ हो जाएगी. लगातार यह बात सामने आती रही है कि बसपा भाजपा के करीब है तो बसपा को चुनाव में इसका नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.

बसपा को तय करना होगा भाजपा को लेकर अपनी स्पष्ट रणनीति

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. दिलीप अग्निहोत्री यह भी कहते हैं कि उपचुनाव के परिणाम आने के बाद बसपा की स्थिति ठीक नहीं रहती है, तो स्वाभाविक रूप से बहुजन समाज पार्टी को भविष्य में अपनी राजनीति की दिशा जरूर तय करनी होगी. सबसे अहम यह है कि उन्हें यह भी तय करना होगा कि वह भाजपा के प्रति सॉफ्ट रहेंगी या फिर आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए अपने मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए किस प्रकार से रणनीति बनाएंगी. उपचुनाव के परिणाम स्वाभाविक रूप से बसपा की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले जरूर होंगे. कुल मिलाकर बसपा सुप्रीमो मायावती को भविष्य के लिए अपनी स्पष्ट रणनीति जरूर बनानी होगी.

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