लखनऊ: चित्रकूट के वाल्मीकि आश्रम में महर्षि वाल्मीकि की जयंती की पूर्व संध्या पर पूजा-पाठ कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा की सियासी पूंजी को संजोये रखने की कोशिश की है। साथ ही दलित उत्पीड़न के मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटे विपक्ष को भी संकेतों में जवाब दिया है कि भाजपा शासित सरकार ही दलितों की सच्ची हितचिंतक है। हाथरस में वाल्मीकि परिवार के साथ हुई घटना के मद्देनज़र विपक्ष लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर था।
वाल्मीकि समाज में गलत संदेश न जाए लिहाजा भाजपा सरकार ने सधा हुआ सियासी कदम उठाया। दो दिन पहले ही वाल्मीकि जयंती के अवसर पर सभी मंदिरों में वाल्मीकि रामायाण का पाठ करने के सरकार ने निर्देश दिए। फिर खुद मुख्यमंत्री ने चित्रकूट जाकर साफ संकेत दिया कि वाल्मीकि समाज पार्टी और सरकार के लिए न केवल महत्व रखते हैं बल्कि उनकी हितों की भी पार्टी को चिंता है। वहीं ऐसा काफी अरसे बाद हुआ जब कोई मुख्यमंत्री वाल्मीकि समाज के मंदिर में जाकर भव्य समारोह में इस तरह शामिल हुए हों।
राजनाथ सिंह सरकार में वाल्मीकि समाज से रामचंद्र वाल्मीकि मंत्री रहे। वाल्मीकि समाज को महत्व देने के संघ के एजेंड पर भाजपा ने वर्ष 2017 में पूरी संजीदगी से काम किया। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने वाल्मीकि समाज को वाजिब प्रतिनिधित्व दिया। प्रदेश में कमोबेश तीन दर्जन सीटें ऐसी हैं जहां वाल्मीकि समाज का सियासी असर रहता है। ऐसा पहली बार हुआ जब तीन विधायक राजवीर दिलेर, अलीगढ़ की खैर विधानसभा से अनूप प्रधान और मुजफ्फरनगर की पुरकाजी सीट से प्रमोद इसी समाज से जीत कर आए। राजवीर दिलेर बाद में हाथरस से सांसद भी बने। हालांकि वाल्मीकि समाज को यह टीस अभी भी सालती है कि उनके समाज के अभी तक कोई कैबिनेट मंत्री नहीं बनाया गया।
ऐसा भी नहीं है कि भाजपा सरकारों में ही वाल्मीकि समाज को हिस्सेदारी दी गई। मायावती सरकार में राम विलास वाल्मीकि मंत्री रहे। समाजवादी पार्टी में भी सफाई कर्मचारी नेता दुर्गेश वाल्मीकि को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का सदस्य बनाया गया। दलित नेता और अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष रामजी लाल निर्मल कहते हैं–वाल्मीकि परंपरागत तौर पर भाजपा के साथ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत बने शौचालयों का निर्माण कराया गया। भाजपा सरकार में ही मुख्यमंत्री रहे राजनाथ सिंह ने सामाजिक न्याय समिति का गठन किया और हुकुम सिंह कमेटी गठित की ताकि दलितों में हाशिए पर जा चुके वाल्मीकियों के आरक्षणों को नए सिरे से तय किया जा सके।

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