tara patkarलखनऊ। दो दशक तक राजधानी में पत्रकारिता जगत का सफर करने के बाद अब फक्कड़ पत्रकार तारा पाटकर राजनीति की पथरीली राहों पर चल पडे हैं। वह निर्दल प्रत्याशी के रूप में लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से ही अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं। लखनऊ को जाम व प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए पिछले एक साल से श्साइकिल डेश् घोषित करने की मांग कर रहे तारा पाटकर का मानना है कि जब तक राजनैतिक प्रदूषण के खिलाफ जंग नहीं छेडी जायेगी तब तक देश व प्रदेश को किसी भी प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिलने वाली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्र व बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार नकुल दुबे जैसे दिग्गजों के बीच में तारा पाटकर ने भी निर्दल प्रत्याशी के रूप में ताल ठोंक दी है। विभिन्न राजनैतिक दलों के एजेण्डे में हाशिए पर डाल दिये गये पर्यावरण मुद्दे को ही पाटकर अपना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं। स्वस्थ लखनऊए सुंदर लखनऊ व सुखी लखनऊ उनका नारा है। वह साइकिल से पूरे लोकसभा क्षेत्र का दौरा कर जनता से सीधे संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। वह लखनऊ को प्रदूषण मुक्तए जाम मुक्तए गंदगी मुक्तए मच्छर मुक्त और बीमारी मुक्त बनाना चाहते हैं। साथ ही शहर के पर्यावरण प्रेमी नागरिकों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। वह दस पेड लगाने वाले को ग्रीन बोनस अपने घर के बाहर नालियों व मुहल्ले को साफ सुथरा रखने वाले नागरिकों को क्लीन बोनस और सडक़ पर प्रदूषण व जाम को कम करने में योगदान देने वाले नागरिकों को स्ट्रीट बोनस दिलाना चाहते हैं। पाटकर कहते हैं कि देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जहां भी आजकल जाते हैं लोगों से यही अपील करते हैं कि लोग दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कर्मठ व ईमानदार लोगों को चुनकर संसद में भेजें। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे तो देश भर में 50 निर्दल उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने के लिए जा रहे हैं। अपने अभियान की शुरूआत वे पूना से कर रहे हैं। संसद में देशभक्त और ईमानदार लोगों की जरूरत है न कि किसी पार्टी विशेष को बहुमत देने की। उत्तर प्रदेश में है तो बहुमत वाली अखिलेश सरकार। क्या कर रही है सब जानते हैं। हम नागरिकों को सोचना होगा कि आखिर किसे और क्यों वोट दे रहे हैंए कहीं हम देश से दगा तो नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि ऐसी क्या बात हैकि नक्सल प्रभावित इलाकों में भय केबावजूद 65 फीसदी मतदान होता है लेकिन नवाबोंकेइस शहर मेंमतदान का प्रतिशत 50 फीसदी भी नहीं हो पाता। सन 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में तो लखनऊ में 35 फीसदी से कम मतदान हुआ था। मतदान के प्रति लोगों की ये उदासीनता भारी चिंताजनक है। हकीकत तो यह है कि 60 फीसदी से ज्यादा नागरिक तो किसी भी दल को वोट ही नहीं देना चाहते। गर्मी बढ रही हैए ऐसे में लोगों को घरों से निकालना बडी चुनौती है। मैं लोगों को ये समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि मतदान ही असली महादान है। अगर आपने रक्तदानए नेत्रदान आदि नहीं किया तो कोई बात नहीं लेकिन मतदान अवश्य करिये। इससे आप अपनाए मुहल्ले काए शहर काए प्रदेश और देश का कल्याण कर सकते हैं। जिस तरह से चुनाव में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को सरकार भत्ता देती है। उसी तरह नागरिकों को वोटिंग बोनस देना चाहिए। देश से राजनैतिक प्रदूषण खत्म करने के लिए चुनावी महायज्ञ में आहुति देनी जरूरी है। बातचीत में उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवनए सामाजिक सरोकारए पर्यावरण आंदोलन व हजारों किमी की साइकिल यात्रा के साथ.साथ वर्तमान राजनीति पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी और कहा कि हमें मिल.जुल कर लखनऊ को देश का सबसे खूबसूरत शहर बनाना है। लोकसभा चुनाव भले ही राष्ट्रीय मुद्दों पर लडा जाता हो लेकिन उन स्थानीय समस्याओं को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है जो कैंसर जैसी बीमारी बनकर हमारे लिए नासूर बनती जा रही हैं। वह लखनऊ को मच्छरमुक्त बनाना चाहते हैं। इसके लिए वह नगर निगम के सहयोग पूरे शहर में बिना भेदभाव के युद्धस्तर पर फागिंग करवायेंगे। जन सहयोग से विशेष सफाई अभियान चलवायेंगे। स्कूलों मेंए मुहल्लों में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर लगवायेंगे। गोमती नदीए शहर की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासतों को संजोने के लिए कार्य करेंगे। बुजुर्गों व महिलाओं के लिए सीनियर सिटीजन क्लब व महिला क्लब खुलवायेंगे जिसमें समाचार पत्रए पत्रिकाएं, इंडोर गेम्स आदि के साथ उनकी मदद के लिए डाक्टर व वकील भी होंगे। सभी बाजारों में महिला व पुरूष टायलेट बनवायेंगे जिनकी सभी जगह बेहद कमी है। पटरी दुकानदारों को पुलिस व नगर निगम की तानाशाही से मुक्त करायेंगे। गरीबी का मजाक उडाने वाली न्यूनतम आय की सीमा रेखा को बदलवाने के लिए संघर्ष करेंगे। ग्रामीण व शहरी इलाकों के लिए निर्धारित यह सीमा रेखा क्रमश: 26 व 32 रूपये को क्रमश: 300 व 400 रूपये प्रतिदिन करवायेंगे।

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