petrolसरकारी ऑइल फर्में लोकसभा चुनाव के लिए पहले राउंड की वोटिंग से ठीक पहले पेट्रोल की कीमत में 1.25 रुपए प्रति लीटर की कटौती करेंगी। हालांकि, डीजल 50 पैसे लीटर महंगा हो जाएगा। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला किया गया है कि जब तक इलेक्शन कमिशन मंजूरी नहीं देता, तब तक कैबिनेट से मंजूर हर महीने कीमत बढ़ाने के प्लान को बाधित नहीं किया जाएगा।
मामले से वाकिफ एक सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘चुनाव आयोग ने 1 अप्रैल से गैस की कीमत बढ़ाने की इजाजत नहीं दी। हालांकि, यह अलोकप्रिय फैसला था और इससे मौजूदा सरकार पर नेगेटिव असर पड़ सकता था। डीजल की कीमत में बढ़ोतरी को टालना निश्चित तौर पर एक पॉप्युलर कदम है। मुमकिन है कि चुनाव आयोग इसकी इजाजत नहीं दे। अधिकारियों के मुताबिक, चुनाव आयोग डीजल की कीमत में रूटीन बढ़ोतरी को टालना वोटरों को लुभाने का जरिया मान सकता है, जो चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है।
पेट्रोल की कीमत सरकारी ऑइल फर्मों की तरफ से तय की जाती है। हालांकि, औपचारिक तौर पर कंपनियां फैसला लेने से पहले ऑइल मिनिस्ट्री से सलाह लेती हैं। डीजल की कीमत कैबिनेट के जरिए तय होती है। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया, ‘डीजल की कीमत में 50 पैसे लीटर की रूटीन बढ़ोतरी कैबिनेट का फैसला है और इसे कैबिनेट ही टाल सकती है। हालांकि, कैबिनेट सेक्रेटेरियट चुनाव आयोग की मंजूरी के बगैर कैबिनेट के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं करेगा

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