ओड़िशा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्षा प्रभाती परिड़ा ने राज्य सरकार से की मांग
भुवनेश्वर से देबदत्त रथ
महिलाओं के प्रति हर दिन हिंसा, दुराचार, घरेलू हिंसा और हत्याएं जैसे घटनाएं बढ़ रही हैं। NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं कें प्रति दुराचार जैसे अपराधों में ओड़िशा देश में अबल नंबर राज्य है। अब, जगतसिंहपुर जिले के तिर्तोल क्षेत्र के एक नाबालिग के साथ कटक के चौलियागंज पुलिस थाना के तहत गतिराउत पटना में 22 दिनों तक दुष्कर्म किया गया। तीन सप्ताह से अधिक समय तक कटक पुलिस कमिश्नरेट एरिया में यह होता रहा, लेकिन पुलिस को पता तक नहीं चला। हालाकि अब दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन राज्य में लगभग हर दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही है। कुछ दिन पहले मल्कानगिरी जिले पुलिस कैंटीन में एक आदिवासी महिला के साथ बलात्कार और हत्या की हालिया घटना घटी। बिरमित्रपुर थाने के अंदर एक पुलिस अधिकारी द्वारा छह महीने तक एक नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ बलात्कार किया गया। लेकिन दोनों घटनाओं के खिलाफ अभितक ऐसे कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी। राज्य में लगभग हर दिन ऐसी घटनाएं घटती रहती है, लेकिन पुलिस प्रसासन के तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं लिया जा रहा है। जसको लेकर ओड़िशा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्षा प्रभाती परिड़ा नें उद्बेग प्रकाश करते हुए कहा है कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घटती रहती है क्योंकि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई सख्त कानून नहीं हैं। महिला सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार सम्बेदनसील नहीं है और लापरवाही बरत रहीं हैं।
देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सख्ती दिखाते हुए गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। अब पुलिस की लापरवाही पर अधिकारी भी नपेंगे। पीड़िताओं को अक्‍सर घटना के बाद थाने के चक्‍कर काटने पड़ते हैं, उनकी बात नहीं सुनी जाती। इसपर MHA ने साफ कहा है कि एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी न की जाए। गृह मंत्रालय ने कहा है कि एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। मंत्रालय ने आईपीसी और सीआरपीसी के प्रावधान गिनाते हुए कहा कि राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेश इस एडवायजरी का पालन सुनिश्चित करें। गृह मंत्रालय ने चेतावनी देते हुए कहा क‍ि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई की जानी चाहिए। संज्ञेय अपराध की स्थिति में एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। जिसके तहत कानून में ‘जीरो एफआईआर’ का भी प्रावधान है। IPC की धारा 166 A(c) के तहत, एफआईआर दर्ज न करने पर अधिकारी को सजा का प्रावधान है। सीआरपीसी की धारा 173 में बलात्‍कार से जुड़े मामलों की जांच दो महीनों में करने का प्रावधान है। MHA ने इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल बनाया है जहां से मामलों की मॉनिटरिंग हो सकती है। सीआरपीसी के सेक्‍शन 164- A के अनुसार, बलात्‍कार/यौन शोषण की मामले की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर पीड़‍िता की सहमति से एक रजिस्‍टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर मेडिकल जांच करेगा। इंडियन एविडेंस ऐक्‍ट की धारा 32(1) के अनुसार, मृत व्‍यक्ति का बयान जांच में अहम तथ्‍य होगा। फोरेंसिंक साइंस सर्विसिज डायरेक्‍टोरेट ने यौन शोषण के मामलों में फोरेंसिंक सबूत इकट्ठा करने, स्‍टोर करने की गाइडलाइंस बनाई हैं। उनका पालन हो। अगर पुलिस इन प्रावधानों का पालन नहीं करती तो न्‍याय नहीं हो पाएगा। अगर लापरवाही सामने आती है तो ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई होनी चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा जारी इस एडवाइजरी को राज्य सरकार त्वरित कार्यकारी करने के लिए ओड़िशा भाजपा प्रदेश उपाध्यक्षा प्रभाती परिड़ा नें अपील की है।

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