अरविन्द शर्मा
लखनऊ।आप और हम कई बार दोपहर में बैंक जाते हैं और बैंककर्मी आधे घण्टे के लंच का बहाना करके काउंटर से गायब हो जाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि बैंकों में कोई लंच टाइम नहीं होता है। बैंकों को अपने ग्राहकों को सुबह 10 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक अबाधित सेवाएं मुहैया करवाने का नियम है।
ऐसा भी नहीं है कि बैंककर्मी लंच नहीं कर सकते। बैंक में कर्मचारियों के लिए आंतरिक आधे घण्टे का लंच टाइम होता है। इसमें एक कर्मचारी लंच करने जाता है तो दूसरा कर्मचारी काउंटर संभालता है।
पहले कर्मचारी के आने के बाद दूसरा कर्मचारी लंच के लिए जाता है। कहने का अर्थ यह है कि बैंक के अधिकारी व कर्मचारी लंच टाइम का बहाना करके ग्राहकों से लेन-देन अथवा उनका कोई भी काम करने से मना नहीं कर सकते।
हर बैंक का अलग लंच टाइम
सूचना के अधिकार के तहत प्रयागराज के कैंट निवासी कमल पारीक की ओर से एसबीबीजे बैंक से मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है। एसबीबीजे के अंचल कार्यालय ने बताया कि बैंक में भोजनावकाश का कोई समय नहीं है। प्रत्येक रविवार और दूसरे व चौथे शनिवार को छोड़कर प्रतिदिन सुबह दस बजे से लेकर शाम चार बजे तक लेन देन का समय होता है।
इसके उलट एक सच्चाई यह भी है कि सरकारी बैंकों के साथ निजी बैंक अपनी सुविधानुसार ग्राहकों के लिए आधे घण्टे का लंच टाइम घोषित कर देते हैं। कुछ दोपहर 1 बजे, कुछ 1.30, कुछ 2 बजे और कुछ दोपहर 2.30 बजे लंच टाइम का बहाना करते हैं।एक आम शिकायत यह भी है कि बैंक अपने ग्राहकों को जानकारी दिए बगैर उनके खाते से स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी शुरू कर देते हैं। यह पॉलिसी 50 से 100 रुपए वार्षिक शुल्क में होती है।  बैंक जाने के दौरान ग्राहक एक साल के लिए तो यह पॉलिसी आरंभ करवा देते हैं। अगले साल नवीनीकरण के लिए ग्राहक से अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन अधिकतर बैंक ग्राहक से पूछे बगैर दूसरी साल उसकी पॉलिसी शुरू कर देते हैं।
एक काउंटर खुला रहता है
यह सच है कि बैंक में लंच टाइम नहीं होता है, लेकिन आंतरिक तौर पर आधे घण्टे का लंच होता है। इस दौरान एक काउंटर खुला रहता है, जिससे ग्राहकों का काम बंद नहीं होता।

एलएन जालानी, राष्ट्रीय सचिव, ऑल इण्डिया एसबीबीजे एम्पलॉई को-ऑर्डिनेशन कमेटी

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